महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नाशिक सीट से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार गोकुल गीते ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उन्हें पिछले आठ दिनों से लगातार चुनाव मैदान से हटने के लिए विभिन्न माध्यमों से प्रलोभन दिए जा रहे हैं, लेकिन वह किसी भी प्रकार का समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं।
गोकुल गीते ने मीडिया से बातचीत में बताया कि महायुति के अधिकृत उम्मीदवार नरेंद्र दराडे के समर्थन में उन्हें चुनाव से हटाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास कई माध्यमों से संदेश भेजे गए, लेकिन उन्होंने किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
गीते ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने के लिए बुलाया गया था। हालांकि मुख्यमंत्री दिल्ली दौरे पर होने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी। अब वह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात करेंगे और अपनी बात रखेंगे।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र दराडे के परिजनों ने भी उनके परिवार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मुलाकात से इनकार कर दिया। गीते ने स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने का उनका निर्णय जनभावना के आधार पर है और क्षेत्र के मतदाता चाहते हैं कि वह चुनाव मैदान में बने रहें।
गोकुल गीते ने दावा किया कि पिछले छह वर्षों में नरेंद्र दराडे ने अपेक्षित जनकार्य नहीं किए, जिसके कारण कई मतदाता उनसे नाराज हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि निष्क्रिय रहे हैं और इसी वजह से लोगों ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करना होगा तो वह घर बैठना स्वीकार कर सकते हैं, लेकिन किसी अन्य उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेंगे। उनका कहना था कि सिद्धांतों से समझौता करना उनके स्वभाव में नहीं है।
गीते ने बताया कि उनका भाजपा में कोई आधिकारिक पद नहीं है, लेकिन उनके भाई गणेश गीते लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे रहकर किए गए उनके कार्यों से भाजपा को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला है।
विधान परिषद चुनाव के दौरान घोड़ाबाजार और राजनीतिक जोड़तोड़ की चर्चाओं के बीच गोकुल गीते का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने दोहराया कि किसी भी प्रकार के दबाव, प्रलोभन या राजनीतिक समीकरण के बावजूद वह चुनाव मैदान में बने रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाशिक विधान परिषद चुनाव में गोकुल गीते की मौजूदगी मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है। वहीं उनके प्रलोभन संबंधी आरोपों ने चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।








