ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री केयर स्टारमर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। स्टारमर ने कहा कि लेबर पार्टी के नए नेता के चयन तक वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि सत्ता का शांतिपूर्ण और व्यवस्थित हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके।
स्टारमर के इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन एक दशक में अपने सातवें प्रधानमंत्री की ओर बढ़ रहा है। पिछले 10 वर्षों में यह छठी बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा है।
लगातार बढ़ रहा था इस्तीफे का दबाव
केयर स्टारमर के इस्तीफे के पीछे सबसे बड़ा कारण उनकी अपनी पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष माना जा रहा है। जुलाई 2024 के आम चुनाव में भारी बहुमत से सत्ता में आने के बाद शुरुआती महीनों में सरकार को व्यापक समर्थन मिला था, लेकिन समय के साथ उनकी लोकप्रियता लगातार गिरती चली गई।
लेबर पार्टी के कई सांसदों का मानना था कि मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही वजह रही कि पिछले कुछ महीनों से पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज होती गई।
आर्थिक चुनौतियां बनी सबसे बड़ी वजह
स्टारमर सरकार अपने कार्यकाल के दौरान कई मोर्चों पर दबाव में रही। ब्रिटेन में आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार, महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत (Cost of Living Crisis) सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी रही।
इन आर्थिक समस्याओं का असर सीधे जनता के बीच सरकार की लोकप्रियता पर पड़ा। विपक्ष ने भी लगातार सरकार को इन मुद्दों पर घेरा, जिससे स्टारमर की स्थिति और कमजोर होती गई।
विवादों ने भी बढ़ाई मुश्किलें
सरकार की छवि को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा जब पूर्व सांसद पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया गया। बाद में उनका नाम यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों में आने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
हालांकि सरकार ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष और मीडिया ने इस मामले को लेकर स्टारमर सरकार पर लगातार सवाल उठाए।
विदेश नीति में मिली थी सराहना
घरेलू मोर्चे पर चुनौतियों के बावजूद केयर स्टारमर की विदेश नीति की कई देशों ने सराहना की।
उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूरोपीय देशों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संकट के दौरान भी उनकी सरकार की कूटनीतिक पहल को सकारात्मक माना गया।
कौन होगा अगला प्रधानमंत्री?
केयर स्टारमर के इस्तीफे के बाद अब लेबर पार्टी नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी।
सबसे मजबूत दावेदारों में एंडी बर्नहैम का नाम सामने आ रहा है। वे लंबे समय से लेबर पार्टी से जुड़े हैं और वर्तमान में ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर हैं। हाल ही में उन्होंने संसद का विशेष चुनाव भी जीता है।
इसके अलावा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग भी नेतृत्व की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला लेबर पार्टी के सांसदों और संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया के बाद ही होगा।
10 साल में सातवें प्रधानमंत्री की तैयारी
ब्रिटेन में पिछले एक दशक के दौरान राजनीतिक अस्थिरता लगातार बढ़ी है।
इस अवधि में डेविड कैमरून, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस, ऋषि सुनक और अब केयर स्टारमर समय से पहले पद छोड़ चुके हैं।
ब्रेक्जिट जनमत संग्रह के बाद से ब्रिटिश राजनीति लगातार नेतृत्व परिवर्तन, आंतरिक मतभेद और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है। स्टारमर का इस्तीफा इसी राजनीतिक अस्थिरता की एक और कड़ी माना जा रहा है।
सत्ता हस्तांतरण तक बने रहेंगे प्रधानमंत्री
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए केयर स्टारमर ने कहा कि वे नए नेता के चयन तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता देश में स्थिरता बनाए रखना और सत्ता का सुचारु हस्तांतरण सुनिश्चित करना है। अब पूरे ब्रिटेन की नजर लेबर पार्टी के नेतृत्व चुनाव और देश के अगले प्रधानमंत्री पर टिकी हुई है।








