अवास कैवर्त | छत्तीसगढ़ | समाचार वाणी न्यूज़
करीब आठ वर्षों से लंबित पेंड्रा बायपास परियोजना को लेकर जिला प्रेस क्लब गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने निर्णायक पहल करते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। प्रेस क्लब ने घोषणा की है कि अब यह मुद्दा केवल समाचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनहित के व्यापक अभियान के रूप में उठाया जाएगा।
गौरेला में आयोजित बैठक में पत्रकारों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से शीघ्र मुलाकात कर परियोजना के लिए तत्काल बजट स्वीकृत करने की मांग की जाएगी। साथ ही जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को भी ज्ञापन भेजकर वर्षों से लंबित इस परियोजना को शीघ्र पूरा कराने की मांग की जाएगी।
जिला प्रेस क्लब के अध्यक्ष असद सिद्दीकी ने बताया कि 24 सितंबर 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने लगभग 13 किलोमीटर लंबे पेंड्रा बायपास का शिलान्यास किया था। इसे क्षेत्र के विकास की महत्वपूर्ण परियोजना बताया गया था, लेकिन आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
प्रेस क्लब के सचिव योगेंद्र नहरेल ने बताया कि वर्ष 2018 में लगभग 54.25 करोड़ रुपये की स्वीकृत इस परियोजना की अनुमानित लागत अब बढ़कर करीब 105 करोड़ रुपये हो चुकी है। वहीं भूमि अधिग्रहण की लागत भी 10.58 करोड़ रुपये से बढ़कर 54.71 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय ने कहा कि परियोजना के लिए 286 किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई, लेकिन अधिकांश किसानों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। इससे किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और उनकी जमीन वर्षों से उपयोगहीन पड़ी है।
कोषाध्यक्ष ज्ञान शर्मा ने कहा कि बायपास के अभाव में राष्ट्रीय राजमार्ग-130 का भारी यातायात आज भी पेंड्रा नगर के बीच से गुजरता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। स्कूल, अस्पताल और बाजार क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।
संयुक्त सचिव अजीत गहलोत ने कहा कि यह केवल सड़क निर्माण का मामला नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा, किसानों के अधिकार और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रेस क्लब तब तक इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहेगा, जब तक बायपास निर्माण कार्य शुरू नहीं हो जाता।
बैठक में प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, ताकि जनहित की इस मांग को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया जा सके।








