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  • Samruddhi Interiors के संस्थापक उमेश चंद्रकांत साटम ने मेहनत और विश्वास से खड़ा किया करोड़ों का व्यवसाय

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    कड़ी मेहनत, संघर्ष और कभी हार न मानने के जज़्बे से सफलता की नई मिसाल कायम करने वाले उमेश चंद्रकांत साटम आज Samruddhi Interiors के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं। महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के कणकवली तालुका स्थित वाघेरी गांव से शुरू हुआ उनका सफर आज मुंबई और गोवा में करोड़ों रुपये के कमर्शियल इंटीरियर प्रोजेक्ट्स तक पहुंच चुका है।

    साधारण परिवार से शुरू हुआ संघर्ष

    उमेश साटम का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ। उनके पिता देवगढ़ के एक होटल में कार्यरत थे, जबकि उनकी माता गृहिणी होने के साथ सिलाई का काम करती थीं। आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं। स्कूल की छुट्टियों के दौरान वे अपने पिता के साथ होटल में काम करते थे और उसी कमाई से अपनी किताबें, कॉपियां और स्कूल का सामान खरीदते थे।

    मुंबई में 50 रुपये प्रतिदिन से करियर की शुरुआत

    स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2004 में वे पहली बार मुंबई आए। शुरुआती दिनों में उन्होंने मात्र 50 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी से काम शुरू किया। बाद में एक कंपनी में ऑफिस बॉय के रूप में नौकरी मिली, जहां उन्होंने केवल कार्यालय का काम ही नहीं बल्कि लेथ मशीन, मिलिंग मशीन और अन्य तकनीकी कार्य भी सीखे।

    उनकी लगन को देखकर उनके वरिष्ठों ने उन्हें वाहन चलाना सिखाया और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया। इसी दौरान उन्हें अपने पहले मार्गदर्शक निपुण चव्हाण का साथ मिला, जिनसे उन्होंने कार्यशैली, अनुशासन और नेतृत्व की महत्वपूर्ण सीख प्राप्त की।

    कई बार आई मुश्किलें, लेकिन हिम्मत नहीं हारी

    साल 2006 में अपेंडिक्स ऑपरेशन के कारण उन्हें गांव लौटना पड़ा। वापस आने पर कंपनी बंद हो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने गारमेंट उद्योग में नौकरी की और अपनी मेहनत से कुछ ही महीनों में वेतन लगभग दोगुना करा लिया।

    वर्ष 2009 और फिर 2014 में कंपनियां बंद होने के कारण उन्हें दोबारा बेरोजगारी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान विवाह, घर की जिम्मेदारी और आर्थिक संकट ने जीवन को और कठिन बना दिया। यहां तक कि उन्हें अपना घर भी खोना पड़ा और परिवार के साथ किराए के मकान में रहना पड़ा।

    पत्नी के विश्वास ने बदल दी जिंदगी

    2019 में उन्होंने गारमेंट उद्योग छोड़कर इंटीरियर सेक्टर में कदम रखने का बड़ा फैसला लिया। शुरुआत उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ एक हेल्पर के रूप में की ताकि इस क्षेत्र की बारीकियां सीख सकें।

    इस कठिन दौर में उनकी पत्नी प्रिया साटम ने उन पर पूरा विश्वास जताया और हर कदम पर उनका साथ दिया। उन्होंने अपने गहने तक गिरवी रख दिए ताकि उमेश अपना पहला स्वतंत्र प्रोजेक्ट पूरा कर सकें।

    लॉकडाउन के बाद शुरू हुआ नया सफर

    कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद उन्हें एक इंटीरियर कंपनी में काम करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने कंपनी का कारोबार लगभग 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 4.5 करोड़ रुपये तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    बाद में उन्होंने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया और Samruddhi Interiors की स्थापना की।

    पहला प्रोजेक्ट बना सफलता की नींव

    कंपनी का पहला बड़ा प्रोजेक्ट L&T Finance से मिला। सीमित संसाधनों के बावजूद समय से पहले गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करने के कारण उन्हें लगातार नए अवसर मिलने लगे।

    इसके बाद कंपनी को HDFC ERGO, Kalpataru, PSIPL और The St. Regis Goa जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोजेक्ट्स प्राप्त हुए।

    आज करोड़ों का कारोबार

    फरवरी 2023 में शुरू हुई Samruddhi Interiors आज तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का वार्षिक ऑफिस इंटीरियर व्यवसाय लगभग ₹2.5 करोड़ तक पहुंच चुका है और कंपनी में 16 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।

    वर्तमान में कंपनी मुंबई और गोवा में सफलतापूर्वक सेवाएं दे रही है तथा भविष्य में पूरे भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।

    सफलता का श्रेय परिवार और साथियों को

    उमेश साटम अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी पत्नी प्रिया, बेटी समृद्धी तथा अपने मित्रों रामावतार जी, रोहित नायक, सुशांत धुरे और पंचमी को देते हैं। उनका मानना है कि परिवार का विश्वास, मित्रों का सहयोग और निरंतर सीखने की इच्छा ही किसी भी व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

    भविष्य का लक्ष्य

    Samruddhi Interiors का उद्देश्य केवल इंटीरियर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारत में गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और आधुनिक कमर्शियल इंटीरियर समाधान उपलब्ध कराना है। उमेश साटम का विश्वास है कि मेहनत, ईमानदारी और ग्राहकों का भरोसा ही उनके व्यवसाय को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।

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