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  • भारत-पाक टेंशन के बीच देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 2 अरब डॉलर से अधिक की गिरावट, सोने का भंडार भी हुआ कम।

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    भारत-पाक टेंशन के बीच देश के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई है. 2 मई को समाप्त सप्ताह में 2.06 बिलियन डॉलर की गिरावट के साथ यह 686.06 बिलियन डॉलर पर आ गया है.

    भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच देश के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई डेटा के मुताबिक, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने 2 मई को समाप्त सप्ताह में 2.06 बिलियन डॉलर की गिरावट के साथ 8 हफ्ते तक लगातार बढ़ते रहने के अपने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. इस गिरावट के साथ भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 686.06 बिलियन डॉलर पर आ गया है, जबकि 25 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में यह 1.98 बिलियन डॉलर बढ़कर 688.13 बिलियन डॉलर हो गया था.

    विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में मामूली बढ़त
    भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 514 मिलियन डॉलर की मामूली वृद्धि के साथ 581.18 बिलियन डॉलर हो गईं. डॉलर के संदर्भ में व्यक्त विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी यूनिट्स की मूल्यवृद्धि या मूल्यह्रास का प्रभाव शामिल होता है. हालांकि, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बढ़त की भरपाई सोने के भंडार में आई 2.55 मिलियन डॉलर से हुई, जो अब घटकर 81.82 बिलियन डॉलर रह गई हैं.

    इतने महीने का अब हो सकता है आयात
    IMF के पास रखे जाने वाले एसडीआर या विशेष आहरण अधिकार भी 30 मिलियन डॉलर घटकर 18.56 बिलियन डॉलर पर आ गए. रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया कि देश के पास अभी जितना विदेशी मुद्रा भंडार है वह लगभग 10-12 महीनों के लिए अनुमानित आयात का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त है.

    देश के विदेशी मुद्रा भंडार में उतार-चढ़ाव सितंबर से देखे जा रहे पैटर्न के अनुरूप है, जब रिजर्व धीरे-धीरे गिरने से पहले 704.89 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया था. उस दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था. तब विदेशी मुद्रा बाजार में रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप के कारण अस्थिरता को रोकने में मदद मिली.

    पिछले साल देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 20 बिलियन डॉलर से अधिक की वृद्धि हुई थी. जबकि 2023 में विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 58 बिलियन डॉलर की वृद्धि हुई थी. जो 2022 में दर्ज की गई 71 बिलियन डॉलर की गिरावट के विपरीत है.

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