भारतीय आईटी पेशेवरों और कामकाजी युवाओं के लिए अमेरिका का H-1B वीजा हमेशा से करियर और अवसरों का सबसे बड़ा जरिया रहा है। लेकिन हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस वीजा पर टैक्स बढ़ाने का फैसला भारतीय समुदाय में गहरी चिंता का विषय बन गया है। इस फैसले पर शनिवार को कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल भारतीय युवाओं के भविष्य के खिलाफ है बल्कि यह भी दर्शाता है कि ट्रंप भारत के हितों के सच्चे मित्र नहीं हो सकते।
सुरेंद्र राजपूत की आपत्ति
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने प्रेस वार्ता में कहा कि ट्रंप सरकार का यह कदम भारतीय आईटी सेक्टर और विदेश में नौकरी कर रहे लाखों भारतीय पेशेवरों पर प्रतिकूल असर डालेगा। उन्होंने कहा, “हमें यह समझना होगा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए डोनाल्ड ट्रंप हमारे मित्र नहीं हो सकते। उनका हर निर्णय अमेरिकी राजनीति और वोट बैंक को ध्यान में रखकर होता है, न कि भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती के लिए।”
राजपूत ने सवाल उठाया कि भारतीय सरकार इस मसले पर अब तक खामोश क्यों है। उन्होंने कहा कि यह समय केवल बयानबाजी का नहीं बल्कि ठोस कूटनीतिक पहल का है।
H-1B वीजा और भारतीयों की भूमिका
H-1B वीजा उन विदेशी पेशेवरों के लिए जारी किया जाता है जो अमेरिका में विशेष कौशल वाली नौकरियों के लिए नियुक्त किए जाते हैं। भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स इस वीजा श्रेणी का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। हर साल जारी होने वाले H-1B वीजा में लगभग 70% हिस्सेदारी भारतीयों की होती है।
ट्रंप सरकार द्वारा टैक्स बढ़ाने का सीधा असर भारतीय कंपनियों और कर्मचारियों पर पड़ेगा। आईटी कंपनियों को अपने कर्मचारियों को अमेरिका भेजने के लिए ज्यादा खर्च उठाना होगा और इसका बोझ अंततः कर्मचारियों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप की नीतियों पर निशाना
सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि ट्रंप का यह फैसला अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी” का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप भारत को केवल एक बाजार के रूप में देखते हैं, न कि एक रणनीतिक सहयोगी के रूप में।
उन्होंने कहा, “ट्रंप की नीतियां भारतीय हितों के खिलाफ हैं। चाहे वह व्यापार संतुलन का मुद्दा हो या वीजा पॉलिसी का, हर बार भारत को नुकसान झेलना पड़ता है।”
राजपूत ने यह भी कहा कि भारतीय आईटी सेक्टर पहले से ही मंदी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा है। ऐसे में अमेरिकी सरकार का यह कदम स्थिति को और खराब करेगा।
भारतीय युवाओं की चिंता
ट्रंप के फैसले से भारतीय छात्रों और पेशेवरों में निराशा का माहौल है। लाखों छात्र अमेरिका में पढ़ाई कर हर साल H-1B वीजा के जरिए वहां नौकरी पाते हैं। लेकिन टैक्स बढ़ने से कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने से हिचकिचाएंगी।
एक आईटी प्रोफेशनल ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह फैसला हमारे सपनों को तोड़ देगा। हम पढ़ाई और कौशल में मेहनत करते हैं, लेकिन राजनीतिक फैसलों के कारण हमें अवसर नहीं मिल पाएंगे।”
कांग्रेस बनाम केंद्र सरकार
सुरेंद्र राजपूत ने मोदी सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विदेश नीति का मतलब केवल विदेश यात्राएं और फोटो खिंचवाना नहीं है। वास्तविक कूटनीति यह है कि जब दूसरे देश भारत के खिलाफ फैसले लें तो उन्हें मजबूती से चुनौती दी जाए।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को भारत का सबसे बड़ा दोस्त बताया था। अब जब वही दोस्त भारतीय युवाओं के खिलाफ नीतियां बना रहा है तो सरकार क्यों चुप है?”
विपक्षी दलों और संगठनों की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी इस फैसले की आलोचना की है। कई संगठनों ने कहा कि भारत को अमेरिका के सामने मजबूती से अपनी बात रखनी चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत समय रहते इस फैसले का विरोध नहीं करेगा तो आने वाले वर्षों में भारतीय आईटी सेक्टर को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी की बात होती रही है। लेकिन ट्रंप के फैसले इस रिश्ते पर असर डाल सकते हैं। व्यापार युद्ध, आयात शुल्क और अब वीजा टैक्स जैसे कदम दोनों देशों के रिश्तों को तनावपूर्ण बना सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशियाई देशों में भी अवसर तलाशने चाहिए। इससे भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों का मानना है कि ट्रंप अपने चुनावी फायदे के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि भारतीय सरकार को अमेरिकी कंपनियों पर दबाव बनाना चाहिए ताकि भारतीय कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहें।
कई ट्विटर यूजर्स ने मोदी सरकार को घेरते हुए लिखा कि अगर वह सच में ‘मजबूत सरकार’ है तो ट्रंप के इस फैसले का विरोध करे।







