इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

मुंबई के बहुचर्चित 1993 सीरियल बम धमाकों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। इस आतंकी हमले के मुख्य आरोपी और अंडरवर्ल्ड डॉन टाइगर मेमन की संपत्तियों को अब सरकार नीलाम करने की तैयारी कर रही है। विशेष टाडा अदालत ने टाइगर मेमन और उसके परिवार के सदस्यों की कुल 17 संपत्तियों का ब्यौरा तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक (सम्पत्ति समपहरण) अधिनियम प्राधिकरण यानी SAFEMA को सौंपा है। इनमें मुंबई के माहिम स्थित वह अल हुसैनी बिल्डिंग भी शामिल है, जहां 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों की साजिश रची गई थी।
इन संपत्तियों की नीलामी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, SAFEMA ने इनमें से आठ संपत्तियों का कब्जा पहले ही ले लिया है। इन आठ में तीन फ्लैट अल हुसैनी बिल्डिंग में हैं, जो माहिम के मशहूर इलाके में स्थित है। इसी बिल्डिंग में टाइगर मेमन अपने पांच भाइयों और मां के साथ रहता था। अधिकारियों के मुताबिक, यह वही जगह है जहां मुंबई को दहलाने वाली आतंकी साजिश को अमल में लाने की योजना तैयार की गई थी।
1993 के सिलसिलेवार बम धमाके देश के इतिहास की सबसे भयावह आतंकी घटनाओं में से एक थे, जिनमें करीब 257 लोगों की जान गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इन धमाकों के पीछे टाइगर मेमन और उसके सहयोगी दाऊद इब्राहिम का हाथ माना गया था। दोनों ही इस हमले के बाद देश छोड़कर फरार हो गए थे और तब से अब तक पाकिस्तान में छिपे बताए जाते हैं।
टाडा कोर्ट और जांच एजेंसियों ने लंबे समय से टाइगर मेमन और उसके परिवार से जुड़ी संपत्तियों का पता लगाया है। इनमें मुंबई, ठाणे और आसपास के इलाकों में करोड़ों की प्रॉपर्टी शामिल है। SAFEMA को मिली सूची में कुल 17 संपत्तियों का विवरण है, जिनमें से अधिकांश मुंबई महानगर क्षेत्र में हैं। अब इन संपत्तियों की नीलामी से मिलने वाली रकम को सरकारी खजाने में जमा कराया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन बोली प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक संपत्ति की कीमत का आकलन सरकारी मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा किया जा चुका है। नीलामी की तिथि जल्द ही आधिकारिक रूप से घोषित की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले भी सरकार ने मुंबई धमाकों से जुड़े फरार अपराधियों की संपत्तियों को जब्त किया था। कई मौकों पर इन संपत्तियों को नीलाम करने की कोशिश की गई थी, लेकिन कानूनी अड़चनों और विरोध के कारण प्रक्रिया अधूरी रह गई। इस बार टाडा अदालत की अनुमति के बाद SAFEMA को सीधा अधिकार मिला है कि वह इन संपत्तियों की नीलामी कर सके।
अधिकारियों का मानना है कि यह कदम न केवल न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि आतंकवादियों के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी है कि भारत की न्याय व्यवस्था किसी भी दोषी को बख्शने वाली नहीं है, चाहे वह कितनी भी दूर क्यों न हो। टाइगर मेमन का परिवार लंबे समय से फरार बताया जाता है, लेकिन उनकी छोड़ी हुई संपत्तियां अब सरकारी कब्जे में जा रही हैं।
इन नीलाम होने वाली संपत्तियों में माहिम की अल हुसैनी बिल्डिंग के अलावा, बांद्रा और अंधेरी के कुछ व्यावसायिक स्थल और आवासीय फ्लैट भी शामिल हैं। कुछ संपत्तियों पर अभी कानूनी विवाद चल रहा है, लेकिन प्रमुख आठ संपत्तियां पूरी तरह से सरकार के कब्जे में हैं और इन्हें सबसे पहले नीलाम किया जाएगा।
इस नीलामी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि बम धमाकों से जुड़ी जांच और उससे संबंधित आर्थिक लाभ के पहलुओं पर एक महत्वपूर्ण प्रगति होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन अन्य फरार अपराधियों के लिए भी एक कड़ा सबक होगा जो देश में किए गए अपराधों के बाद विदेशों में शरण लेकर कानून से बचने की कोशिश करते हैं।
मुंबई में टाइगर मेमन और उसके परिवार की करोड़ों की संपत्तियों की यह नीलामी न केवल एक कानूनी कार्रवाई है, बल्कि 1993 के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है।








