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भारत का पहला शहरी मैंग्रोव्स पार्क बनकर तैयार हो चुका है और यह दिसंबर 2025 में आम जनता के लिए खोला जाएगा। यह पार्क मुंबई के बोरीवली के गोराई इलाके में बनाया गया है, जिसे देश के पहले इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया गया है। केंद्रीय मंत्री और उत्तर मुंबई के सांसद पीयूष गोयल ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि गोराई मैंग्रोव्स पार्क न केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बनेगा बल्कि मुंबई की हरित पहचान को भी नई दिशा देगा।
गोयल ने बताया कि इस पार्क के बाद दहिसर में भी एक और मैंग्रोव्स पार्क तैयार किया जा रहा है, जिसे अगले चरण में जनता के लिए खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों प्रोजेक्ट मिलकर ₹110 करोड़ की लागत से तैयार किए जा रहे हैं और ये परियोजनाएं न केवल मुंबई के पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करेंगी बल्कि पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेंगी।
गोराई स्थित यह मैंग्रोव्स पार्क 8 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां पर्यटकों के लिए मैंग्रोव ट्रेल, बर्ड ऑब्जर्वेट्री, और क्याक ट्रेल जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
पार्क का मुख्य आकर्षण 800 मीटर लंबा वॉकवे है, जो मैंग्रोव्स के बीच से होकर गुजरता है। इस ट्रेल से पर्यटक नजदीक से इन दुर्लभ समुद्री पौधों और पक्षियों की प्रजातियों को देख सकेंगे।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, मैंग्रोव्स समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये पौधे तटीय इलाकों को कटाव, बाढ़ और तूफानों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। मुंबई में पिछले कुछ दशकों में अतिक्रमण और प्रदूषण के कारण मैंग्रोव्स की संख्या में भारी कमी आई थी, ऐसे में यह पार्क इनकी रक्षा और जागरूकता का नया केंद्र बनेगा।
पीयूष गोयल ने कहा कि गोराई मैंग्रोव्स पार्क को ‘ग्रीन मुंबई, क्लीन मुंबई’ अभियान का प्रतीक बनाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट न केवल हरित पर्यटन (Eco-Tourism) को बढ़ावा देगा, बल्कि मुंबईकरों को प्रकृति के करीब लाने का भी अवसर देगा।
उन्होंने कहा, “यह पार्क न केवल पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण बनेगा, बल्कि इससे जुड़ी गतिविधियां स्थानीय युवाओं को रोजगार भी देंगी। बर्ड ऑब्जर्वेशन, क्याकिंग और गाइडेड नेचर ट्रेल जैसी गतिविधियां पर्यटकों के लिए नया अनुभव साबित होंगी।”
गोराई पार्क के बाद दूसरा मैंग्रोव्स पार्क दहिसर में विकसित किया जा रहा है। इस पार्क के अगले वर्ष तक तैयार होने की उम्मीद है। दोनों पार्कों को एक-दूसरे से ग्रीन कॉरिडोर के जरिये जोड़ा जाएगा ताकि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
मुंबई के 50 किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में मैंग्रोव्स पाए जाते हैं, जो अरब सागर से सटे इलाकों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं। महाराष्ट्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय ने इस परियोजना को प्राथमिकता दी है ताकि शहरीकरण के बीच भी प्रकृति की मौजूदगी बनी रहे।
गोराई मैंग्रोव्स पार्क का उद्घाटन दिसंबर 2025 में किया जाएगा। उम्मीद है कि यह स्थान न केवल मुंबई बल्कि देशभर के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन जाएगा। इसमें स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों के लिए भी विशेष नेचर एजुकेशन प्रोग्राम्स शुरू किए जाएंगे ताकि युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत के अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि यह दिखाएगा कि कैसे विकास और प्रकृति एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
इस तरह, मुंबई का गोराई मैंग्रोव्स पार्क भारत में ग्रीन अर्बन डेवेलपमेंट की नई शुरुआत है — जहां शहर की रफ्तार के बीच प्रकृति की शांति का अनुभव किया जा सकेगा।








