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  • ईवीएम का वीडियो बनाकर वायरल करना पड़ा भारी, बिहार में चार लोगों पर चुनाव आयोग ने दर्ज कराई FIR

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    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच ईवीएम पर वोट डालते समय वीडियो बनाना और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करना चार युवकों को भारी पड़ गया। चुनाव आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। आयोग ने इसे न केवल चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताया, बल्कि मतदाता गोपनीयता से जुड़ा एक गंभीर अपराध करार दिया है।

    मामला उस समय सामने आया जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा, जिसमें कुछ लोग मतदान केंद्र के भीतर ईवीएम मशीन पर वोट डालते हुए दिखाई दे रहे थे। यह वीडियो न केवल चुनाव की गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन था, बल्कि यह भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के भी खिलाफ था। जांच में पाया गया कि यह वीडियो बिहार के एक विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र का था, जिसके बाद तुरंत प्रशासन हरकत में आया।

    बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वीडियो की जांच के बाद चार व्यक्तियों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। यह मामला जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दायर किया गया है। चुनाव आयोग ने साफ किया कि मतदान केंद्र के भीतर वीडियो या फोटो लेना पूर्णतः प्रतिबंधित है और ऐसा करना चुनाव की निष्पक्षता के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

    चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “मतदान केंद्र की गोपनीयता हमारे लोकतांत्रिक तंत्र की आत्मा है। कोई भी व्यक्ति यदि मतदान करते समय वीडियो या फोटो बनाता है, तो वह न केवल कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करता है बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया की पवित्रता को भी नुकसान पहुंचाता है।” अधिकारी ने यह भी कहा कि आयोग इस तरह की घटनाओं पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगा।

    सूत्रों के मुताबिक, यह घटना पहले चरण के मतदान के दौरान घटी थी। जांच एजेंसियों ने वायरल वीडियो का लोकेशन ट्रैक कर यह पता लगाया कि यह किस मतदान केंद्र से बनाया गया था। वीडियो बनाने वालों में से कुछ स्थानीय निवासी हैं जबकि एक व्यक्ति बाहरी इलाके से आया था। सभी आरोपितों से पुलिस पूछताछ कर रही है।

    बिहार पुलिस ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जिन लोगों ने यह वीडियो बनाया, वे अपने मोबाइल फोन का उपयोग कर ईवीएम स्क्रीन को रिकॉर्ड कर रहे थे। वीडियो वायरल होने के बाद इसे सोशल मीडिया पर कई समूहों में शेयर किया गया, जिससे अफवाहों और गलत सूचनाओं का प्रसार हुआ।

    चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है कि मतदान केंद्र के अंदर किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसा करने वाले व्यक्ति को छह महीने से एक साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। आयोग ने जिलों के चुनाव अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि मतदान केंद्रों पर मोबाइल फोन के उपयोग पर सख्त निगरानी रखी जाए।

    इस घटना के बाद आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी पत्र लिखकर ऐसे सभी वीडियो को तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय प्रशासन से कहा है कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गंभीरता को कमजोर करती हैं। भारत में वोटिंग एक गोपनीय प्रक्रिया है, और मतदाता की पसंद को गुप्त रखना लोकतंत्र की मूल आत्मा है। आयोग ने इस मामले को एक उदाहरण के रूप में देखा है ताकि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति इस तरह की गलती न करे।

    चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे मतदान केंद्र में अपने मोबाइल फोन या कैमरा उपकरणों का इस्तेमाल न करें और मतदान की गोपनीयता का सम्मान करें। आयोग ने कहा कि “मतदान के दौरान फोटो या वीडियो बनाना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि इससे लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगता है।”

    बिहार में इस समय विधानसभा चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को संपन्न हुआ, जबकि दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा। नतीजों की घोषणा 14 नवंबर को की जाएगी। ऐसे में आयोग नहीं चाहता कि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर असर डाले।

    यह घटना उन मतदाताओं के लिए एक सख्त संदेश है जो सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने या दिखावा करने के लिए चुनाव नियमों की अनदेखी करते हैं। आयोग का कहना है कि मतदाताओं को लोकतंत्र के इस उत्सव में जिम्मेदारी और सम्मान के साथ भाग लेना चाहिए।

    इस कार्रवाई के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति मतदान केंद्र में मोबाइल से ईवीएम या मतदान प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग करने से पहले दो बार जरूर सोचेगा।

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