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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण से ठीक पहले महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को हो चुका है, लेकिन चुनाव आयोग 10 नवंबर तक भी वोटिंग डेटा सार्वजनिक नहीं कर पाया।
तेजस्वी यादव ने कहा कि “आज तकनीक का जमाना है, फिर भी महिलाओं और पुरुषों के वोटिंग प्रतिशत के आंकड़े छिपाए जा रहे हैं। 11 नवंबर को दूसरा चरण है और नतीजे 14 नवंबर को घोषित होंगे, लेकिन तब तक जनता को यह पता नहीं चलेगा कि पहले चरण में कितने लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है। लगता है BJP जितना पाप करेगी, EC उस पर पर्दा डालेगा।”
वोटिंग आंकड़ों को लेकर उठाया सवाल
तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा कि चुनाव आयोग का यह रवैया लोकतंत्र के प्रति अनुचित है। उन्होंने सवाल किया कि जब वोटिंग डेटा के लिए तकनीक उपलब्ध है, तो आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे। उनका मानना है कि जनता को पारदर्शिता और निष्पक्षता की गारंटी मिलनी चाहिए, खासकर जब चुनाव की गिनती में सभी दलों और मतदाताओं की निगरानी हो रही हो।
तेजस्वी ने दावा किया कि पहले चरण के मतदान के बाद भी आंकड़े छिपाने से भ्रष्टाचार और राजनीतिक पक्षपात की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वह जल्द से जल्द वोटिंग अनुपात और आंकड़े जनता के सामने लाए।
महागठबंधन की चिंता
महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव का कहना है कि बिहार में चुनाव जातीय और गठबंधन आधारित राजनीति के लिए जाना जाता है। ऐसे में मतदान आंकड़ों का छिपाना राजनीतिक दलों और मतदाताओं के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह न केवल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्रभावित करता है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।
तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा कि BJP चुनाव में कई गैरकानूनी और अनुचित गतिविधियों में शामिल हो रही है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग इन घटनाओं को नजरअंदाज कर रहा है, जिससे लोकतंत्र पर सवालिया निशान लग रहा है। उन्होंने कहा कि जनता और मीडिया की निगरानी से ही ऐसी गतिविधियों का खुलासा संभव है।
राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रिया
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहले चरण का रिकॉर्ड 65% मतदान दिखा चुका है। हालांकि मतदान आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, जिससे राजनीतिक दलों के बीच असंतोष और आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजस्वी यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस महागठबंधन के चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। उनका उद्देश्य है कि चुनाव आयोग और बीजेपी पर लोकतांत्रिक और प्रशासनिक दबाव बनाया जाए। साथ ही यह जनता और मतदाताओं को यह संदेश देने का अवसर भी है कि महागठबंधन पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव के लिए खड़ा है।
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले तेजस्वी यादव के बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग और BJP का रवैया लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के आंकड़े और वोटिंग प्रतिशत के सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने वास्तविक हैं।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने यह भी संकेत दिया कि बिहार में चुनावी राजनीति अब तक की सबसे सक्रिय और तीव्र है। मतदाता और राजनीतिक दल दोनों ही इस पर नजर बनाए हुए हैं, और आने वाले नतीजे 14 नवंबर को घोषित होंगे।








