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भारतीय सशस्त्र सेना का संयुक्त अभ्यास ‘त्रिशूल’ (TSE-2025) आन, बान और शान के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस अभ्यास में भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना ने मिलकर युद्ध क्षमता और सामरिक कौशल का प्रदर्शन किया। राजस्थान, गुजरात और उत्तरी अरब सागर में आयोजित इस अभ्यास ने न केवल सेना की तैयारियों को परखा, बल्कि यह भी दिखाया कि भारत तीनों सेनाओं के बीच उच्च स्तर का तालमेल बनाए रखता है।
इस अभ्यास में लगभग 30,000 जवान और 40 से अधिक विमान शामिल हुए। इसके अलावा, विभिन्न पैरामिलिट्री फोर्स और केंद्रीय एजेंसियां भी इस अभ्यास में अपनी भूमिका निभाने के लिए सक्रिय रहीं। ‘त्रिशूल’ के माध्यम से भारत ने यह संदेश भी दिया कि वह किसी भी बाहरी चुनौती के लिए पूरी तरह से तैयार है।
‘त्रिशूल’ अभ्यास 3 से 7 नवंबर के बीच संपन्न हुआ। इस दौरान राजस्थान और गुजरात से लेकर उत्तरी अरब सागर तक विविध ड्रिल और युद्धाभ्यास किए गए। वेस्टर्न नेवल कमांड ने इस अभ्यास की अगुवाई की, जबकि भारतीय सेना की दक्षिणी कमान और भारतीय वायु सेना के दक्षिण-पश्चिम कमान ने इसे साझा रूप से संपन्न करने में योगदान दिया।
इस अभ्यास के दौरान भूमि, समुद्र और हवा में विभिन्न युद्ध परिदृश्य तैयार किए गए। सेना ने दुश्मन के संभावित हमलों का मुकाबला करने के लिए रणनीतिक स्थितियों का अभ्यास किया, नौसेना ने समुद्री बाधाओं और समुद्री युद्धकौशल का प्रदर्शन किया, जबकि वायु सेना ने हवाई समर्थन और आकाशीय नियंत्रण की शक्ति दिखाई।
‘त्रिशूल’ केवल एक अभ्यास नहीं था, बल्कि यह भारत की सामरिक तैयारी और रक्षा तंत्र की मजबूती का परिचायक भी था। पाकिस्तान समेत अन्य पड़ोसी देशों की नजरों में इस अभ्यास ने डर और सतर्कता दोनों ही पैदा कर दी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस अभ्यास से भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि उसकी संयुक्त युद्ध क्षमता और सेना का समन्वय क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए मजबूत और भरोसेमंद है।
अभ्यास के दौरान सैनिकों का मनोबल और रणनीतिक सोच भी उच्च स्तर पर परखी गई। जवानों ने विभिन्न युद्धक परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने और टीम वर्क के माध्यम से मिशन को सफल बनाने की क्षमता दिखाई। इसके साथ ही, विमान और युद्धक तकनीक का उपयोग करके नए हथियार प्रणालियों और उन्नत युद्ध तकनीकों का परीक्षण भी किया गया।
अभ्यास की सफलता के बाद रक्षा विशेषज्ञों ने इसे भारत की सुरक्षा और सामरिक तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह अभ्यास न केवल सेना के कौशल को बढ़ाता है, बल्कि भविष्य में संभावित खतरों के मुकाबले में तत्परता और तैयारी सुनिश्चित करता है।
विशेष रूप से, वेस्टर्न कमांड की अगुवाई में होने वाला यह अभ्यास सैन्य रणनीति, तकनीकी दक्षता और राष्ट्र की सुरक्षा में सुधार का एक आदर्श उदाहरण बना। जवानों ने न केवल प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया बल्कि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और साझा जिम्मेदारी को भी मजबूत किया।
‘त्रिशूल’ अभ्यास ने साबित कर दिया कि भारतीय सशस्त्र सेना हर तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। 30,000 जवानों, 40 से अधिक विमानों और उच्चस्तरीय तकनीकी संयंत्रों के साथ संपन्न यह अभ्यास भारत की सैन्य शक्ति और सामरिक उत्कृष्टता का प्रतीक बन गया है।
इस अभ्यास के माध्यम से भारत ने यह भी संदेश दिया कि वह अपने क्षेत्र और समुद्री सीमाओं की रक्षा में सक्षम और सशक्त है। साथ ही, यह अभ्यास भविष्य में किसी भी संभावित आक्रामकता का सामना करने के लिए सेना की तत्परता और युद्धकौशल का प्रमाण भी है।







