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मुलांपुर दाखा में शुक्रवार, 15 नवंबर 2025 को कुल हिंद किसान सभा पंजाब का बहुप्रतीक्षित 41वां सूबाई डेलीगेट इजलास बकायदा शुरू हो गया। दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन का उद्घाटन सभा के सूबा प्रमुख कॉमरेड रूप बसंत सिंह वड़ैच ने झंडा लहराकर किया। पंजाब के विभिन्न जिलों से पहुँचे 200 से अधिक चुने हुए डेलीगेटों ने इस इजलास में शिरकत की, जो राज्य में किसान आंदोलन की एक बड़ी और महत्वपूर्ण बैठक मानी जा रही है।
इस अवसर पर कुल हिंद किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड अशोक धावले, उपाध्यक्ष कॉमरेड इंदरजीत सिंह, कैशियर कॉमरेड पी. कृष्णा प्रसाद और पंजाब इकाई के पूर्व महासचिव कॉमरेड सुखविंदर सिंह सेखों विशेष तौर पर उपस्थित रहे। उनके आगमन ने सम्मेलन को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बना दिया। इजलास की शुरुआत में महासचिव कॉमरेड बलजीत सिंह गरेवाल द्वारा दिवंगत साथियों को श्रद्धांजलि देने हेतु दो मिनट का मौन रखा गया। इस दौरान हॉल में मौजूद सभी प्रतिनिधियों ने साथी साथियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान को स्मरण किया।
स्वागत समिति के चेयरमैन कॉमरेड सतनाम सिंह वड़ैच ने अपने संबोधन में लुधियाना जिले के किसान आंदोलन में निभाई गई अहम भूमिका को याद किया। उन्होंने हाल में हुए खुशहैसियत टैक्स वापसी आंदोलन के दौरान पिंड एतियाना में शहीद हुई महिलाओं की बहादुरी को विशेष रूप से उल्लेखित किया। उन्होंने कहा कि किसानों की यह लड़ाई केवल खेत-खलिहानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई है। इस मौके पर उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व, पंजाब नेतृत्व और सम्मेलन में शामिल सभी डेलीगेटों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
कॉमरेड अशोक धावले ने अपने संबोधन में कहा कि देश आज जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें फिरकापरस्ती, तानाशाही और लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण का खुलकर विरोध करना किसानों और आम नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन ने यह साबित किया है कि जब किसान एकजुट होते हैं, तो बड़े से बड़ा सत्ता तंत्र भी झुकने पर मजबूर हो जाता है। उन्होंने पंजाब के किसानों की संघर्षशील परंपरा की सराहना की और कहा कि यही ऊर्जा आने वाले समय में भी किसान आंदोलन को मजबूत बनाएगी।
इजलास की अध्यक्षता कॉमरेड रूप बसंत सिंह और सभी उपाध्यक्षों ने संयुक्त रूप से की। मंच पर मौजूद नेतृत्व ने प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दों—जैसे एमएसपी कानून, खेती की लागत, भूमि सुरक्षा, बिजली दरें और सहकारी ढांचे की मजबूती—पर महत्वपूर्ण चर्चाएं कीं। यह भी स्पष्ट किया गया कि किसान सभा आगामी महीनों में जनसंपर्क अभियानों से लेकर व्यापक आंदोलन की रूपरेखा पर काम करेगी।
इस दो दिवसीय इजलास में कृषि संकट, सरकारी नीतियों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान संगठनों की एकता पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया जाएगा। किसान सभा का मानना है कि पंजाब में किसानों की वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत और संगठित आंदोलन ही सबसे प्रभावी रास्ता है।
सम्मेलन में पहुंचे किसान प्रतिनिधियों के उत्साह और नेतृत्व के जोश को देखकर यह स्पष्ट हो गया कि पंजाब में किसान आंदोलन का यह अध्याय आने वाले समय में नई रणनीतियों, नए संकल्पों और एकजुट संघर्ष के साथ आगे बढ़ने वाला है। इजलास कल तक जारी रहेगा, जिसमें कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिए जाने की संभावना है।








