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  • ‘मस्ती 4’ पर सोशल मीडिया की जंग: मज़ेदार या बकवास? दर्शक दो हिस्सों में बंटे

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    एडल्ट कॉमेडी फ्रेंचाइज़ी ‘मस्ती’ का चौथा पार्ट ‘मस्ती 4’ आखिरकार सिनेमाघरों में पहुंच चुका है और रिलीज के कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर इस फिल्म की चर्चा जोरों पर है। विवेक ओबेरॉय, रितेश देशमुख और आफताब शिवदासानी की तिकड़ी एक बार फिर दर्शकों को हंसाने लौटी है, लेकिन इस बार दर्शकों के रिएक्शन काफी बंटे हुए दिखाई दे रहे हैं। कुछ दर्शक इसे साल की सबसे एंटरटेनिंग फिल्म बता रहे हैं, वहीं कई लोग इसे बेहद चीप और लीचड़ फिल्म के रूप में जता रहे हैं।

    इस फिल्म की खासियत रही है इसकी एडल्ट कॉमेडी और डबल मीनिंग जोक्स की फॉर्मूला राइटिंग, जिसने 2004 में आई पहली ‘मस्ती’ को सुपरहिट बना दिया था। इसके बाद इस फ्रेंचाइज़ी की दूसरी और तीसरी फिल्में भी आईं, लेकिन चौथे पार्ट से उम्मीदें कहीं ज्यादा थीं क्योंकि लगभग सात साल बाद फ्रेंचाइज़ी की वापसी हो रही थी। इस बार निर्देशन की कमान इंद्र कुमार के बजाय मिलाप मिलन जवेरी ने संभाली है, जो इस फ्रेंचाइज़ी के पहले दो पार्ट्स की कहानी लिख चुके हैं।

    रिलीज के तुरंत बाद X (पहले ट्विटर) पर लोगों के रिएक्शन आने शुरू हो गए। एक वर्ग दर्शकों का है जिसने फिल्म को “बेस्ट एंटरटेनमेंट” का तमगा दे दिया है। इन लोगों का कहना है कि फिल्म हंसाने में बिल्कुल भी कमी नहीं छोड़ती और अगर कोई दर्शक थिएटर में सिर्फ हंसी-ठिठोली का मज़ा लेने आया है, तो यह फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरती है। कुछ उपयोगकर्ताओं ने तो फिल्म को 5 स्टार रेटिंग देते हुए कहा कि लंबे समय बाद थिएटर में ‘पुरानी मस्ती वाली फील’ देखने को मिली है।

    लेकिन सोशल मीडिया पर हर कोई इतना खुश नहीं दिखा। कई दर्शकों ने फिल्म को “लीचड़”, “बेहद चीप” और “बिना सिर-पैर की एडल्ट कॉमेडी” कहने में कोई संकोच नहीं किया। आलोचकों का कहना है कि फिल्म में कहानी जैसी कोई चीज नहीं है और पूरा ध्यान सिर्फ डबल मीनिंग संवादों और ओवर द टॉप अभिनय पर रहा है। कुछ उपयोगकर्ताओं ने फिल्म को ‘अपमानजनक’ बताकर यह भी कहा कि फ्रेंचाइज़ी को इस स्तर तक गिरते देखना दुखद है।

    फिल्म की कहानी तीन दोस्तों—अमर, मीट और प्रेम—के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी शादीशुदा जिंदगी से परेशान होकर एक बार फिर रोमांच और गलतफहमियों की दुनिया में जाते दिखते हैं। काफी ज्यादा मसाला, अजीब हालात और लगातार बढ़ते गलतफहमियों के कारण फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं, जो दर्शकों को हंसाते भी हैं और कई बार अटपटा महसूस भी कराते हैं। सोशल मीडिया पर जो लोग फिल्म का समर्थन कर रहे हैं, उनका कहना है कि ‘मस्ती’ फ्रेंचाइज़ी का USP हमेशा से एडल्ट कॉमेडी रहा है, इसलिए इसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए—सिरियस फिल्म नहीं, बल्कि सिर्फ मनोरंजन।

    वहीं जो लोग फिल्म को नकार रहे हैं, उनकी राय है कि बॉलीवुड पहले ही कंटेंट को लेकर संघर्ष कर रहा है और ऐसी फिल्में दर्शकों को निराश करती हैं। कई लोगों ने तो यह तक लिखा कि “यह फिल्म थिएटर में समय और पैसे दोनों की बर्बादी है।”

    फिर भी यह साफ है कि फिल्म ने चर्चा जरूर पैदा कर दी है। यही वजह है कि कई सिनेमाघरों में ओपनिंग शो में अच्छी भीड़ देखने को मिली। विवेक ओबेरॉय, रितेश देशमुख और आफताब शिवदासानी की तिकड़ी हमेशा की तरह अपनी कॉमिक टाइमिंग और चेहरे के एक्सप्रेशन से दर्शकों को बांधने की कोशिश करती नजर आई। कुछ आलोचकों ने कहा कि कलाकारों ने अपने किरदारों को निभाने में ईमानदारी दिखाई, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट ने कई जगह मज़ा किरकिरा कर दिया।

    निर्देशक मिलाप मिलन जवेरी ने अपनी तरफ से इस फ्रेंचाइज़ी को नया रंग देने की कोशिश की, लेकिन सोशल मीडिया के अनुसार फिल्म कई जगहों पर पिछली फिल्मों का रीपीट फॉर्मूला लगती है। हालांकि कुछ प्रशंसक यह भी कह रहे हैं कि ‘मस्ती 4’ एक ऐसी फिल्म है जिसे परिवार के साथ नहीं बल्कि दोस्तों के साथ देखना चाहिए, ताकि हास्य का मज़ा बेहतर तरीके से लिया जा सके।

    दर्शकों की राय चाहे जो भी हो, यह तो तय है कि ‘मस्ती 4’ ने लोगों की भावनाओं को दो हिस्सों में बांट दिया है। जहां एक तरफ यह फिल्म उन लोगों को बेहद पसंद आ रही है जो बिना लॉजिक की हंसी-मजाक वाली फिल्में पसंद करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सिनेमा में कंटेंट और क्रिएटिविटी को प्राथमिकता देने वाले दर्शक निराश हैं। अब देखना यह होगा कि बॉक्स ऑफिस पर ‘मस्ती 4’ कैसा प्रदर्शन करती है और क्या यह फ्रेंचाइज़ी की चमक को बरकरार रख पाएगी या नहीं।

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