इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

महाराष्ट्र राज्य के कई शिक्षक संगठन 5 दिसंबर 2025 को राज्यव्यापी स्कूल बंद का आह्वान कर रहे हैं। यह हड़ताल नए शिक्षकों की नियुक्ति नीति, Sanch Manyata Policy, के खिलाफ है। शिक्षकों का कहना है कि इस नीति में कई ऐसी शर्तें और प्रावधान हैं जो उनके हितों और कामकाजी परिस्थितियों के लिए हानिकारक हैं। इसके चलते सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है, और अनुमानित तौर पर लगभग 18,000 स्कूल बंद रह सकते हैं।
शिक्षक संगठन का आरोप है कि Sanch Manyata Policy नए नियमों के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया को जटिल और कई मामलों में पक्षपातपूर्ण बना रही है। उनका मानना है कि इस नीति से अनुभव और क्षमता के आधार पर चयन की जगह अन्य कारकों को अधिक महत्व दिया गया है। शिक्षक संगठन इस मुद्दे को लेकर सरकार से कई बार बातचीत कर चुके हैं, लेकिन उनका दावा है कि अब तक कोई संतोषजनक हल नहीं निकला है।
इस हड़ताल के कारण छात्रों, अभिभावकों और स्कूल प्रशासन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। कई अभिभावक पहले ही चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है, विशेषकर बोर्ड परीक्षा और अन्य महत्वपूर्ण शिक्षण गतिविधियों के समय में। स्कूल प्रशासन ने भी चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान शिक्षा की निरंतरता बनाए रखना मुश्किल होगा और स्कूल की व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकारी अधिकारी इस स्थिति को गंभीरता से देख रहे हैं और शिक्षक संगठनों के साथ संवाद बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे हड़ताल के प्रभाव को कम करने और छात्रों के हित में स्थिति को नियंत्रण में रखने के उपाय तलाश रहे हैं। इसके तहत स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था, ऑनलाइन कक्षाएं या हड़ताल से प्रभावित छात्रों के लिए विशेष समय सारिणी बनाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की हड़ताल से शिक्षा प्रणाली पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन अगर संवाद और समाधान की प्रक्रिया सुचारू रहे, तो दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रह सकते हैं। उन्होंने सरकार और शिक्षक संगठनों दोनों को सुझाव दिया है कि वे आपसी सहयोग और संवाद के माध्यम से इस विवाद का समाधान खोजें।
राज्यभर के अभिभावकों और छात्रों से अपील की गई है कि वे 5 दिसंबर को स्कूल बंद रहने की संभावना के लिए तैयार रहें और इस दौरान बच्चों की पढ़ाई को घर पर ध्यान में रखें। शिक्षक संगठन का कहना है कि उनकी मांगें न्यायपूर्ण हैं और सरकार को उन्हें गंभीरता से सुनना चाहिए, ताकि भविष्य में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन बना रहे।
इस हड़ताल की खबर आने के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था और संबंधित विभाग पूरी तरह सतर्क हो गए हैं, और सभी स्कूल प्रशासनिक स्तर पर तैयारी कर रहे हैं ताकि छात्रों और अभिभावकों को न्यूनतम असुविधा हो।








