“यश हे एका दिवसाचं फळ नसतं, ते अनेक वर्षांच्या प्रयत्नांचं आणि चिकाटीचं फलित असतं।”
ही ओळ पूर्णपणे लागू होते एका यशस्वी अभियंत्यावर — आशिष विलासराव गव्हाणे यांच्यावर।
रीसील.इन प्रस्तुत कर रहा है ‘यशोस्तुते’,
एक प्रेरणादायी मंच —
जहाँ भारत के उन उद्योगपत्नियों और अभियंताओं की कहानियाँ सामने आती हैं,
जिन्होंने साधारण शुरुआत को असाधारण पहचान में बदला।
“Real Stories | Real Struggles | Real Growth”
इस विचारधारा के साथ
‘यशोस्तुते’ आज समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सशक्त माध्यम बन चुका है।
आशिष विलासराव गव्हाणे
एक अभियंता और नवोन्मेषी उद्योगपती,
जिन्होंने Automotive Ancillary Industry में अपूर्व योगदान दिला।
२० मार्च १९८० को पुणे में जन्मे आशिष गव्हाणे,
St. Joseph Boy’s High School और Convent School से शिक्षा प्राप्त करने के बाद
Engineering (Mechanical) क्षेत्र में प्रवेश किया।
बाल्यकाल से ही “कष्ट म्हणजेच यशाचा शॉर्टकट” का सूत्र उन्होंने अपनाया।
सन २००० में Trainee Engineer के रूप में करियर की शुरुआत।
२७ वर्षों में आशिष गव्हाणे ने उत्कृष्टता, बारकाई और कार्यक्षमता का संगम पेश किया।
उनका सिद्धांत —
“काम फक्त पूर्ण करण्यासाठी करू नका, ते उत्कृष्टतेसाठी करा।”
आधुनिक तंत्रज्ञान का उपयोग कर उत्पादन क्षमता बढ़ाना, कचरा कम करना और टीम में सकारात्मक परिवर्तन लाना।
वे केवल बॉस नहीं, बल्कि प्रेरणादायी मार्गदर्शक हैं।
कंपनी में तकनीकी अड़चनों के समय उन्होंने स्वयं समाधान खोजा और टीम को प्रेरित किया।
उनका मंत्र —
“अडचणी म्हणजे थांबण्याचं कारण नसतं, ती पुढे जाण्याची प्रेरणा असते।”
उच्च दर्जाचे ऑटोमोटिव्ह घटक निर्माण कर भारताला आत्मनिर्भर बनवणं।
तरुण अभियंत्यांना मार्गदर्शन देऊन कौशल्य जागृत करणे।
Best Innovation Award, Excellence in Manufacturing और अनेक अन्य पुरस्कार।विद्यार्थ्यांसाठी कार्यशाळा, कॅम्पस गाईडन्स प्रोग्राम्स आयोजित करणे, उद्योजकतेस प्रोत्साहन।आशिष गव्हाणे की कहानी बताती है —
“स्वतःवर विश्वास ठेवा, आणि यश तुमचं होईलच!”
‘यशोस्तुते’
जल्द ही रीसील अवॉर्ड्स के YouTube चैनल और www.yashostute.com पर।








