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भारत ने कृषि क्षेत्र में एक बड़ा ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। केंद्र सरकार के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भारत ने 2025‑26 में कुल 150.18 मिलियन टन चावल उत्पादन कर चीन (145.28 मिलियन टन) को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बनने का गौरव हासिल किया है। यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को मीडिया से साझा की।
यह उपलब्धि भारतीय कृषि क्षेत्र की निरंतर प्रगति, किसानों की मेहनत और सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि सुधारों का परिणाम है। इससे न केवल घरेलू खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि भारत की वैश्विक खाद्य निर्यात क्षमता भी और बढ़ेगी।
हरित क्रांति से लेकर आज तक का सफर
कृषि मंत्री ने बताया कि भारत ने अपनी पारंपरिक कृषि क्षमताओं को वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचारों के साथ मिलाकर चावल उत्पादन में यह उपलब्धि हासिल की है। उत्पादन वृद्धि के पीछे नई उच्च उपज वाली और जलवायु‑रोधी बीज किस्मों का विकास भी एक महत्वपूर्ण कारण है। इस अवसर पर मंत्री ने 25 प्रमुख फसलों के लिए 184 नई उन्नत बीज किस्में भी जारी कीं, जो किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में मदद करेंगी।
भारत अब दुनिया के कुल चावल उत्पादन में लगभग 28% हिस्सेदारी रखता है, जो वैश्विक स्तर पर चावल उपजाने और निर्यात में उसकी अग्रणी स्थिति को दर्शाता है।
खाद्य सुरक्षा और निर्यात क्षमता में मजबूती
इस उपलब्धि का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को होगा। भारत की चावल उत्पादन क्षमता मजबूत होने से घरेलू मांग आसानी से पूरी होगी और अतिरिक्त उत्पाद का निर्यात भी बढ़ेगा, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिलेगी। कृषि मंत्री ने कहा है कि बेहतर बीज और कृषि तकनीकें किसानों को उच्च उपज और बेहतर आय देने में अहम भूमिका निभाएंगी।
अगर सही तरीके से नई बीज किस्में किसानों तक पहुँचाई जाएँ तो यह परिवर्तन और अधिक सुदृढ़ कृषि उत्पादन की नींव रखेगा। ऐसे में यह उपलब्धि भारत की खाद्य सुरक्षा, निर्यात क्षमता और कृषि अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रतीक बन चुकी है।








