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भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को यूरोप में पश्चिमी शक्तियों द्वारा भारत के ऑपरेशन सिंदूर पर दिए जा रहे “अनचाहे सुझावों” (unsolicited advice) की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अक्सर दूर बैठे देशों को हमारे क्षेत्रीय हालात की सही समझ नहीं होती, इसलिए वे टिप्पणी करने से पहले पहले अपने ही क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान दें।
जयशंकर यह बयान लग्जमबर्ग में भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के दौरान दे रहे थे, जहाँ वे फिलहाल एक आधिकारिक दौरे पर हैं। उन्होंने कहा कि कुछ पश्चिमी देश भारत के सैन्य कदमों पर चिंतित दिखाई देते हैं, लेकिन वे खुद अपने आसपास की हिंसा और जोखिम को देखकर जवाब दें, इससे पहले कि वे किसी और को सलाह दें।
ऑपरेशन सिंदूर को मई 2025 में भारत ने पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में अंजाम दिया था, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर लक्षित कार्रवाई की गई थी। उस कार्रवाई पर कई देशों ने अपनी चिंता व्यक्त की थी।
जयशंकर ने इसके अलावा कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अक्सर देश अपनी व्यावहारिक रुचियों के हिसाब से ही व्यवहार करते हैं, और सलाह देने से पहले उनको भी अपने घर की स्थिति पर गौर करना चाहिए। उन्होंने कहा,
“लोग दूर बैठकर बातें करेंगे — कभी सोच-विचार के साथ, कभी बिना; कभी स्वार्थ से प्रेरित होकर, तो कभी लापरवाही से।”
इस बीच, विदेश मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि उन देशों के साथ सहयोग जारी रहेगा जो सकारात्मक रूप से मिलकर काम करना चाहते हैं, लेकिन जो देश भारत की नीति की आलोचना करते हैं, उनके साथ संबंध अलग तरह से संभाले जाएंगे।
जयशंकर का दौरा— जो फ्रांस और लग्जमबर्ग में चल रहा है— के दौरान उन्होंने राजनीतिक, व्यापारिक और प्रौद्योगिकीय सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया और भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना की।








