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भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे कमजोर होकर 90.22 के स्तर पर कारोबार करते हुए गिरावट दर्ज की। यह कमजोरी मुख्य रूप से मजबूत डॉलर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों द्वारा फंड्स की निकासी के कारण आई है, जिससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपया दबाव में रहा।
शुरुआती कारोबार का हाल
विदेशी विनिमय बाजार में रुपया 90.24 के स्तर पर खुला और जल्दी ही 5 पैसे की गिरावट के साथ 90.22 प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। पिछले सत्र में रुपया 90.17 पर बंद हुआ था, इसलिए यह वृद्धि/कमजोरी रुपये की निरंतर उतार‑चढ़ाव को दर्शाती है।
कमजोरी के प्रमुख कारण
विश्लेषकों के अनुसार, रुपया कमजोर होने के पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:
• डॉलर की मजबूती — वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मुद्रा की मजबूती ने रुपये पर दबाव डाला है।
• कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें — तेल की बढ़ती दरों से भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए मुद्रा की कमजोरी का दबाव बढ़ता है।
• विदेशी निवेशकों की निकासी — विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा शेयरों की बिकवाली से भी रुपया कमजोर हुआ है।
बाजार संकेत
बाजार के अन्य संकेतों के मुताबिक, डॉलर‑इंडेक्स, जो अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की सापेक्ष शक्ति को मापता है, भी एक मजबूत रुख में दिखा, जिससे रुपये पर और दबाव पड़ा।
रुपये का यह दबाव वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और निवेश धारणा की बदलती स्थिति को दर्शाता है, जिससे घरेलू मुद्रा थोड़ा दबाव में बनी हुई है।








