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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां Mamata Banerjee अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से चुनाव हार गईं। भाजपा नेता Suvendu Adhikari ने उन्हें लगभग 15,000 वोटों के अंतर से पराजित कर एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
भवानीपुर सीट, जिसे ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता था, इस बार चुनावी गणित और रणनीति के चलते उनके हाथ से निकल गई। खास बात यह रही कि शुरुआती 15 राउंड तक ममता बनर्जी लगातार बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन अंतिम 5 राउंड में मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल गया।
मतगणना की शुरुआत पोस्टल बैलेट से हुई, जिसमें ममता बनर्जी को शुरुआती बढ़त मिली। इसके बाद ईवीएम की गिनती शुरू हुई और यहां भी उन्होंने शुरुआती राउंड में अपना दबदबा बनाए रखा। पहले राउंड में ममता 3,666 वोटों के साथ आगे थीं, जबकि दूसरे राउंड में उन्हें करीब 2,000 वोटों से पीछे होना पड़ा। हालांकि इसके बाद उन्होंने वापसी करते हुए 15वें राउंड तक लगातार बढ़त बनाए रखी।
15वें राउंड तक ममता बनर्जी को 51,343 वोट मिले थे, जबकि सुवेंदु अधिकारी 48,414 वोटों पर थे। ऐसा लग रहा था कि ममता आसानी से अपनी सीट बचा लेंगी, लेकिन 16वें राउंड से खेल पलटना शुरू हुआ।
16वें राउंड में Suvendu Adhikari ने मामूली अंतर से बढ़त हासिल की और यहीं से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 17वें राउंड में यह बढ़त तेजी से बढ़कर 6,000 से ज्यादा हो गई। इसके बाद 18वें, 19वें और 20वें राउंड में यह अंतर लगातार बढ़ता गया।
अंतिम परिणाम में सुवेंदु अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि Mamata Banerjee 58,812 वोटों पर सिमट गईं। इस तरह सुवेंदु ने 15,105 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
विश्लेषकों के अनुसार, अंतिम राउंड्स में जिन क्षेत्रों के वोटों की गिनती हुई, वहां भाजपा को भारी समर्थन मिला, जिससे पूरा समीकरण बदल गया। शुरुआती राउंड्स में जिन इलाकों से ममता को बढ़त मिली थी, वे उनके पारंपरिक वोट बैंक माने जाते हैं, जबकि बाद के राउंड्स में भाजपा के पक्ष में मतदान अधिक देखने को मिला।
चुनाव से पहले ही सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि शुरुआती राउंड में वे पीछे रह सकते हैं, लेकिन अंत में जीत उनकी ही होगी। उनका यह दावा पूरी तरह सच साबित हुआ। जीत के बाद उन्होंने कहा कि यह जीत बेहद महत्वपूर्ण है और इससे बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा।
इस हार के साथ Mamata Banerjee के 15 साल लंबे शासन का अंत हो गया है। तृणमूल कांग्रेस, जिसने पिछले चुनाव में 215 सीटें जीती थीं, इस बार महज 80 के आसपास सीटों पर सिमट गई।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने 206 सीटों के साथ ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहली बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह परिणाम राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
भवानीपुर सीट का यह परिणाम न केवल एक सीट की हार-जीत है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलते जनादेश और नई राजनीतिक दिशा का प्रतीक भी बन गया है।








