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  • Nepal के नए PM बालेन शाह के फैसलों से बढ़ा भारत-नेपाल तनाव, दो बड़े कदमों से बदले रिश्तों के समीकरण

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    Nepal में नई सरकार बनने के महज दो महीने के भीतर प्रधानमंत्री Balen Shah के दो बड़े फैसलों ने India-नेपाल संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। युवा और सुधारवादी छवि के साथ सत्ता में आए बालेन शाह अब पड़ोसी देश के साथ कूटनीतिक विवादों के कारण चर्चा में हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि उनका रुख काफी हद तक पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli की नीतियों से मिलता-जुलता नजर आ रहा है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में भारत के साथ संबंधों में खटास पैदा की थी।

    बालेन सरकार ने भारत से आने वाले 100 नेपाली रुपये (करीब 63 भारतीय रुपये) से अधिक कीमत के सामान पर अनिवार्य कस्टम ड्यूटी लागू कर दी है। यह ड्यूटी 5% से 80% तक तय की गई है।

    इस फैसले का असर सीधे सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ा है, जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर रहते थे।

    • किराना, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स और शादी-ब्याह का सामान अब महंगा हो गया
    • सीमा क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए
    • भारत-नेपाल के बीच दशकों से चला आ रहा ओपन बॉर्डर ट्रेड सिस्टम प्रभावित हुआ

    भारत द्वारा 2026 की Kailash Mansarovar Yatra की घोषणा के बाद नेपाल ने औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।

    नेपाल का दावा है कि:

    • लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा उसके हिस्से हैं
    • यह दावा 1816 की सुगौली संधि पर आधारित है

    वहीं भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि:

    • लिपुलेख दर्रा 1954 से यात्रा का पारंपरिक मार्ग रहा है
    • नेपाल के दावे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं

    इन दोनों फैसलों के बाद:

    • सीमा पर व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं
    • आम नागरिकों में नाराजगी बढ़ी है
    • दोनों देशों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है

    बालेन शाह का यह रुख संकेत देता है कि नेपाल अपनी विदेश नीति में अधिक आक्रामक और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण अपना सकता है।

    हालांकि, भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध काफी गहरे हैं, ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बातचीत और संतुलन बनाना बेहद जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर, बालेन शाह के ये शुरुआती फैसले उनकी सरकार की दिशा तो तय करते हैं, लेकिन साथ ही यह भी तय करेंगे कि भारत-नेपाल संबंध आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

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