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West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया एक बड़ा निर्णायक फैक्टर बनकर उभरी है। चुनाव से पहले करीब 90 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर देखने को मिला।
Trinamool Congress (TMC) ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया था। लेकिन नतीजों के बाद आंकड़े बताते हैं कि जिन सीटों पर सबसे ज्यादा वोटर हटाए गए, वहां Bharatiya Janata Party (BJP) को स्पष्ट बढ़त मिली।
📊 आंकड़ों में SIR का प्रभाव
- 147 सीटों पर 25,000 से अधिक वोटर हटाए गए
👉 BJP ने 95 सीटें जीतीं
👉 TMC को सिर्फ 51 सीटें मिलीं - 67 सीटें (15,000–25,000 डिलीशन)
👉 BJP: 47 सीट
👉 TMC: 19 सीट - 62 सीटें (5,000–15,000 डिलीशन)
👉 BJP: 50 सीट
👉 बाकी TMC के खाते में - 13 सीटें (5,000 से कम डिलीशन)
👉 सभी सीटों पर BJP की जीत
📍 किन जिलों में सबसे ज्यादा असर
- मुर्शिदाबाद: 4.55 लाख नाम हटे
- नॉर्थ 24 परगना: 3.25 लाख
- मालदा: 2.39 लाख
इन जिलों में TMC का प्रदर्शन पिछले चुनावों की तुलना में काफी गिरा।
- मुर्शिदाबाद में 2021 में 20 सीट जीतने वाली TMC इस बार सिर्फ 9 सीटों पर सिमट गई
- नॉर्थ 24 परगना में 28 से घटकर 8 सीट
- मालदा में भी गिरावट दर्ज
🧭 राजनीतिक संदेश
इस चुनाव ने साफ संकेत दिया कि वोटर लिस्ट में बदलाव और ग्राउंड वोटिंग पैटर्न का सीधा संबंध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- अल्पसंख्यक वोटों में विभाजन
- हिंदू वोटों का एकजुट होना
इन दोनों कारणों से BJP को बड़ा फायदा मिला।
⚖️ विवाद और सवाल
SIR प्रक्रिया को लेकर TMC ने लगातार आरोप लगाए कि यह उनके वोट बैंक को प्रभावित करने की रणनीति थी। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं को हटाने के लिए की गई थी।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में SIR सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि यह एक निर्णायक चुनावी फैक्टर बनकर सामने आई, जिसने राज्य की राजनीतिक दिशा बदल दी।








