सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने शानदार शुरुआत की। शुक्रवार की गिरावट के बाद सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में जोरदार तेजी देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईटी सेक्टर के शेयरों में खरीदारी के दम पर बाजार हरे निशान में खुला, जिससे शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की संपत्ति में करीब 2.25 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो गया।
सेंसेक्स 447 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,100 के पार
सुबह करीब 9:23 बजे बीएसई सेंसेक्स 447 अंकों की बढ़त के साथ 77,249.27 पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी 50 लगभग 130 अंक चढ़कर 24,142 के स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडिया VIX भी 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 12.97 पर पहुंचा, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा मजबूत बना रहा।
रिलायंस और आईटी कंपनियों ने दिखाई मजबूती
सोमवार की तेजी में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचसीएल टेक, इंफोसिस और टेक महिंद्रा के शेयर सबसे अधिक चमके। इन कंपनियों के शेयरों में 1 से 3 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।
वहीं, पावर ग्रिड के शेयरों में करीब 0.6 प्रतिशत की गिरावट रही और यह सेंसेक्स के कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहा।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी
बाजार की तेजी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में भी 0.4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।
सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में कारोबार करते नजर आए, जिनमें निफ्टी आईटी इंडेक्स ने 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया।
एनएसई पर लगभग 1,916 शेयरों में तेजी, 583 शेयरों में गिरावट, जबकि 143 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया।
मध्य पूर्व तनाव के बावजूद बाजार में भरोसा
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रमों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रही। इससे निवेशकों को यह संकेत मिला कि हालात और ज्यादा गंभीर होने की संभावना फिलहाल कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।
आगे बाजार की चाल पर विशेषज्ञों की नजर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की मजबूती, विदेशी निवेशकों की निकासी में कमी और कच्चे तेल की नियंत्रित कीमतें भारतीय शेयर बाजार को आगे भी सहारा दे सकती हैं।
हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यदि वैश्विक तनाव नियंत्रित रहता है तो भारतीय बाजार में तेजी का रुख आगे भी जारी रह सकता है।








