• Create News
  • ▶ Play Radio
  • निर्जला एकादशी 2026: आज शाम इन 4 स्थानों पर जलाएं दीपक, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा से घर में आएगी सुख-समृद्धि

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस एक दिन का व्रत रखने से पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत काल में पांडवों में से भीमसेन सभी एकादशी व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी थी, जिससे उन्हें सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त हो सके।

    इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करते हैं और कठोर निर्जला उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए पूजा-पाठ, दान और विशेष उपायों से भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी की शाम घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर दीपक अवश्य जलाना चाहिए। दीपक को चौखट के दाईं ओर (घर से बाहर निकलते समय) रखकर उसका मुख दक्षिण दिशा की ओर करना शुभ माना जाता है।

    मान्यता है कि ऐसा करने से घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

    लक्ष्मी मंदिर में करें दीपदान

    यदि संभव हो तो इस दिन किसी लक्ष्मी मंदिर में जाकर भगवान और मां लक्ष्मी के चरणों में घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    धार्मिक विश्वास है कि इससे आर्थिक उन्नति, धन-धान्य और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    पीपल के वृक्ष के नीचे जलाएं दीपक

    निर्जला एकादशी की शाम पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है।

    शास्त्रों के अनुसार पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पीपल के नीचे दीपदान करने से जीवन की बड़ी-बड़ी बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को संकटों से मुक्ति मिलती है।

    ईशान कोण में करें दीप प्रज्वलित

    घर के उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को वास्तु और धर्म दोनों दृष्टियों से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस स्थान पर या पूजा घर में शाम के समय दीपक जलाना शुभ माना गया है।

    मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं तथा घर में सुख, समृद्धि, शांति और धन का आगमन होता है।

    क्यों खास है निर्जला एकादशी?

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने वाले भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति का भी उल्लेख मिलता है।

    धार्मिक मान्यता

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी पर व्रत, पूजा, दीपदान और दान-पुण्य करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक आस्था और परंपराएं हैं।

  • Related Posts

    आईटी शेयरों की दमदार रैली से शेयर बाजार में उछाल, निवेशकों को दो मिनट में ₹4.59 लाख करोड़ का फायदा

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को जोरदार शुरुआत करते हुए निवेशकों को बड़ी राहत दी। आईटी कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन…

    Continue reading
    भादरा में महिलाओं के लिए बड़ी सौगात: वर्मा हॉस्पिटल में 9 जुलाई से डॉ. अरुणा सोलंकी देंगी 24×7 सेवाएं, आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क इलाज भी उपलब्ध

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। राजेश चौधरी | भादरा | समाचार वाणी न्यूज़ भादरा क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *