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  • महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर! आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, विधान परिषद उपसभापति पद के उम्मीदवार बने

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    महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को एक और बड़ा झटका देते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और आदित्य ठाकरे के करीबी माने जाने वाले सचिन अहीर ने एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना का दामन थाम लिया है। पार्टी में शामिल होते ही उन्होंने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया।

    इस घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े शक्ति संतुलन के बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

    मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन

    सचिन अहीर ने मंगलवार को विधान परिषद उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री चंद्रकांत पाटिल समेत महायुति के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    नामांकन के दौरान नेताओं की मौजूदगी ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि महायुति इस चुनाव को बेहद महत्वपूर्ण मान रही है।

    शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा राजनीतिक झटका

    सचिन अहीर लंबे समय से आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते रहे हैं। वर्ष 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने वर्ली विधानसभा सीट पर आदित्य ठाकरे के चुनाव अभियान की कमान संभाली थी और उनकी जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई थी।

    ऐसे नेता का अचानक शिंदे गुट में शामिल होना शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है।

    ‘ऑपरेशन टाइगर-3’ की चर्चा तेज

    महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को महायुति के कथित “ऑपरेशन टाइगर-3” का हिस्सा माना जा रहा है।

    शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि आने वाले दिनों में शिवसेना (यूबीटी) के कई और विधायक तथा नेता पार्टी छोड़कर महायुति का हिस्सा बन सकते हैं। माना जा रहा है कि यह अभियान उद्धव ठाकरे के संगठनात्मक आधार को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।

    कौन हैं सचिन अहीर?

    सचिन अहीर महाराष्ट्र की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वे मुंबई की शिवड़ी और वर्ली विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं।

    उनका राजनीतिक सफर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से शुरू हुआ था। विधायक रहते हुए उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में गृह निर्माण राज्यमंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।

    वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने एनसीपी छोड़कर तत्कालीन अविभाजित शिवसेना का दामन थामा था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया।

    शिवसेना में शामिल होने के बाद वे आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए थे।

    वर्ली में आदित्य ठाकरे को चुनौती देने की रणनीति?

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सचिन अहीर को विधान परिषद का उपसभापति बनाने की रणनीति केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि चुनावी भी है।

    वर्ली विधानसभा क्षेत्र आदित्य ठाकरे का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। सचिन अहीर भी इसी क्षेत्र में मजबूत जनाधार रखते हैं और दो बार यहां से विधायक रह चुके हैं।

    ऐसे में माना जा रहा है कि महायुति उन्हें वर्ली में और अधिक मजबूत कर भविष्य में आदित्य ठाकरे के सामने बड़ी चुनौती के रूप में पेश करना चाहती है।

    हालांकि अभी वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव में काफी समय बाकी है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि भविष्य में वर्ली सीट पर आदित्य ठाकरे और सचिन अहीर के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

    महेंद्र दलवी का बड़ा दावा

    शिंदे गुट के विधायक महेंद्र दलवी ने सचिन अहीर के पार्टी में शामिल होने को आदित्य ठाकरे के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका बताया।

    उन्होंने दावा किया कि महायुति का “ऑपरेशन टाइगर-3” अब पूरी तरह शुरू हो चुका है और आने वाले समय में उद्धव ठाकरे गुट के कई विधायक तथा नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होंगे।

    दलवी ने कहा कि महायुति लगातार मजबूत हो रही है और विपक्षी दलों के कई नेता सरकार की विकास नीति से प्रभावित होकर साथ आने को तैयार हैं।

    महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ेगी हलचल

    सचिन अहीर के शिंदे गुट में शामिल होने से महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। इसे केवल एक नेता का दल-बदल नहीं बल्कि शिवसेना (यूबीटी) की संगठनात्मक मजबूती पर बड़ा असर डालने वाली घटना माना जा रहा है।

    अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सचिन अहीर के बाद उद्धव ठाकरे गुट के अन्य नेता भी महायुति का रुख करेंगे या शिवसेना (यूबीटी) इस झटके से जल्द उबरने में सफल होगी। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति और अधिक रोचक होने के संकेत मिल रहे हैं।

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