स्वास्थ्य बीमा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब कुछ मामलों में मरीज को अस्पताल में 24 घंटे भर्ती रहने की अनिवार्यता नहीं होगी। यदि उपचार ऐसी श्रेणी का है जिसे डे-केयर प्रोसीजर (Day Care Procedure) के तहत मान्यता प्राप्त है, तो केवल 2 घंटे अस्पताल में भर्ती रहने के बाद भी कैशलेस मेडिक्लेम का लाभ मिल सकता है।
बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बदलती चिकित्सा तकनीक और आधुनिक उपचार पद्धतियों को ध्यान में रखते हुए बीमा कंपनियों को अपनी पॉलिसियों में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। नई चिकित्सा सुविधाओं के कारण अब कई ऑपरेशन और उपचार कुछ घंटों में ही पूरे हो जाते हैं और मरीज उसी दिन घर लौट सकता है।
मोतियाबिंद, डायलिसिस, कीमोथेरेपी सहित कई उपचार अब डे-केयर प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं। ऐसे मामलों में मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं होती। इसी वजह से 24 घंटे भर्ती रहने की पुरानी शर्त को कई मामलों में व्यावहारिक नहीं माना जा रहा था।
हालांकि, यह सुविधा सभी प्रकार के उपचारों पर लागू नहीं होगी। कैशलेस मेडिक्लेम का लाभ केवल उन्हीं डे-केयर प्रक्रियाओं के लिए मिलेगा, जिन्हें संबंधित स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में शामिल किया गया है। इसलिए किसी भी उपचार से पहले अपनी बीमा कंपनी या थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) से पात्रता की पुष्टि करना आवश्यक होगा।
अस्पताल में मौजूद TPA डेस्क मरीज और उसके परिजनों को कैशलेस क्लेम की प्रक्रिया पूरी करने में सहायता करती है। आवश्यक दस्तावेज जमा होने के बाद बीमा कंपनी से पूर्व स्वीकृति (Pre-Authorization) मिलने पर इलाज का खर्च सीधे अस्पताल को भुगतान किया जाता है, जिससे मरीज को तत्काल भुगतान करने की जरूरत नहीं पड़ती।
IRDAI ने मरीजों के हित में एक और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। यदि इलाज के दौरान किसी मरीज की मृत्यु हो जाती है, तो बीमा कंपनी को अस्पताल के पात्र खर्चों का भुगतान बिना अनावश्यक देरी के करना होगा। इसका उद्देश्य शोक की घड़ी में परिजनों पर आर्थिक और प्रशासनिक बोझ कम करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के अनुरूप किए गए ये बदलाव स्वास्थ्य बीमा को अधिक व्यावहारिक और ग्राहक-केंद्रित बनाएंगे। साथ ही डे-केयर उपचारों को बढ़ावा मिलने से मरीजों को तेज, सुविधाजनक और कम खर्चीला इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
हालांकि, बीमा का लाभ लेने से पहले अपनी पॉलिसी की शर्तें, कवर किए गए डे-केयर उपचारों की सूची और कैशलेस नेटवर्क अस्पतालों की जानकारी अवश्य जांच लें, क्योंकि विभिन्न बीमा कंपनियों के नियम और कवरेज अलग-अलग हो सकते हैं।








