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  • एनर्जी ड्रिंक कंपनियों पर FSSAI की बड़ी कार्रवाई; 14 कंपनियों को नोटिस, जानिए कितना बड़ा है भारत और दुनिया का कारोबार

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    भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने फूड और बेवरेज सेक्टर में भ्रामक दावों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 कंपनियों को नोटिस जारी किया है। इनमें 8 कंपनियां ऐसे उत्पाद बेच रही थीं जिनके नाम और प्रचार में कथित रूप से भ्रामक दावे किए गए, जबकि 6 प्रमुख एनर्जी ड्रिंक ब्रांड्स को उनके विज्ञापनों और उत्पादों पर किए गए दावों को लेकर नोटिस भेजा गया है।

    FSSAI की इस कार्रवाई के बाद देश में एनर्जी ड्रिंक उद्योग और उसके बढ़ते कारोबार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि बिना वैज्ञानिक प्रमाण के किसी भी खाद्य उत्पाद को अतिरिक्त ऊर्जा देने, फोकस बढ़ाने या स्वास्थ्य संबंधी लाभ पहुंचाने वाले दावे करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    भारत में पिछले एक दशक के दौरान एनर्जी ड्रिंक बाजार में तेजी से विस्तार हुआ है। बदलती जीवनशैली, बढ़ती युवा आबादी, फिटनेस के प्रति जागरूकता और तेज रफ्तार कार्य संस्कृति के कारण इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से घरेलू और बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रही हैं।

    बाजार अनुसंधान रिपोर्टों के अनुसार, वैश्विक एनर्जी ड्रिंक उद्योग का मौजूदा आकार लगभग 85 से 92 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 8.1 से 8.8 लाख करोड़ रुपये) का है। अनुमान है कि वर्ष 2033 तक यह बाजार बढ़कर 158 बिलियन डॉलर (करीब 15.1 लाख करोड़ रुपये) से अधिक का हो सकता है।

    वहीं भारत का एनर्जी ड्रिंक बाजार वर्तमान में लगभग 0.75 से 1.5 बिलियन डॉलर (करीब 7,164 करोड़ से 14,328 करोड़ रुपये) का माना जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह बाजार और तेज गति से विस्तार करेगा।

    मार्केट रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में पारंपरिक एनर्जी ड्रिंक्स का बाजार हिस्सेदारी में सबसे बड़ा योगदान रहा, जबकि प्राकृतिक और ऑर्गेनिक एनर्जी ड्रिंक्स की मांग भी लगातार बढ़ रही है। पैकेजिंग के मामले में PET बोतलों का सबसे बड़ा हिस्सा रहा, जबकि ग्लास बोतलों की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। बिक्री के लिहाज से ऑफलाइन और ऑनलाइन रिटेल चैनल अभी भी प्रमुख बने हुए हैं।

    FSSAI ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कोई भी कंपनी बिना वैज्ञानिक प्रमाण के अपने उत्पाद को “तुरंत ऊर्जा देने वाला”, “फोकस बढ़ाने वाला”, “दिमाग तेज करने वाला” या “बीमारी ठीक करने वाला” नहीं बता सकती। ऐसे सभी दावों के लिए नियामक की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है।

    इसके अलावा उत्पाद की पैकेजिंग, ब्रांड नाम और लेबलिंग भी उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाली नहीं होनी चाहिए। यदि कोई कंपनी अपने उत्पाद को “हेल्दी”, “वीगन” या किसी विशेष स्वास्थ्य लाभ वाला बताती है, तो उसे निर्धारित मानकों और लाइसेंसिंग प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।

    पिछले 20 दिनों में FSSAI द्वारा की गई कार्रवाई में कुल 14 कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें शामिल 6 एनर्जी ड्रिंक कंपनियों से उनके उत्पादों पर किए गए स्वास्थ्य और कार्यक्षमता संबंधी दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे गए हैं। नियामक का कहना है कि उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले दावों पर भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

    FSSAI की इस कार्रवाई को देश में फूड सेफ्टी, पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे कंपनियों को अपने विज्ञापनों और उत्पादों की जानकारी को अधिक जिम्मेदारी और नियमानुसार प्रस्तुत करने का स्पष्ट संदेश मिला है।

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