महाराष्ट्र सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 7 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए बताया कि समिति अगले छह महीनों में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके बाद नागपुर में होने वाले शीतकालीन सत्र में UCC का मसौदा पेश करने का प्रयास किया जाएगा।
पूर्व न्यायमूर्ति रंजना देसाई होंगी समिति की अध्यक्ष
सरकार द्वारा गठित इस समिति की अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायमूर्ति रंजना देसाई होंगी। समिति में न्यायपालिका, प्रशासन, कानून, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि व्यापक अध्ययन के बाद समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार किया जा सके।
समिति में कौन-कौन शामिल?
मुख्यमंत्री के अनुसार समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल किए गए हैं:
- पूर्व न्यायमूर्ति रंजना देसाई (अध्यक्ष)
- पूर्व न्यायमूर्ति आर. सी. चव्हाण
- पूर्व न्यायमूर्ति एस. जी. मेहरे
- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डी. के. जैन
- पूर्व एडवोकेट जनरल बीरेंद्र सराफ
- पद्मश्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता रमेश पतंगे
- शिक्षाविद डॉ. सुवर्णा रावल
छह महीने में रिपोर्ट, नागपुर सत्र में आ सकता है विधेयक
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि समिति छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इसके आधार पर नागपुर में होने वाले शीतकालीन विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता का विधेयक दोनों सदनों के समक्ष रखा जाए, जिसके बाद विधायी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
उत्तराखंड के बाद महाराष्ट्र की तैयारी
उत्तराखंड 27 जनवरी 2025 को समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। अब महाराष्ट्र भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि समिति की सिफारिशों और कानूनी अध्ययन के आधार पर ऐसा कानून तैयार किया जाएगा, जो संविधान के अनुरूप और सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए बनाया जाए।








