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भारत और रूस के बीच संबंधों में जल्द ही एक नया अध्याय जुड़ सकता है। रूस, जो इन दिनों घटती जनसंख्या और श्रमिकों की कमी से जूझ रहा है, भारत की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है। मॉस्को चाहता है कि भारत के कुशल और प्रशिक्षित कामगार बड़ी संख्या में रूस जाकर वहां की आर्थिक गतिविधियों में योगदान दें। इस दिशा में दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण रोजगार समझौते पर काम चल रहा है, जिसकी घोषणा अगले महीने होने वाले भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर में नई दिल्ली आने वाले हैं। उनकी इस यात्रा को न केवल सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बल्कि रोजगार के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच “लेबर मोबिलिटी एग्रीमेंट” यानी श्रमिकों के आवागमन पर एक समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इस डील के तहत रूस भारत से अधिक संख्या में कुशल कामगारों को नौकरी पर रख सकेगा, जबकि भारतीय कामगारों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान तय किए जाएंगे।
रूस में इस समय आबादी लगातार घट रही है। युवा वर्ग की संख्या में गिरावट आने से कई क्षेत्रों में श्रमिकों की भारी कमी महसूस की जा रही है। विशेष रूप से निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर में कामगारों की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत, जिसकी आबादी युवा और कुशल श्रमिकों से भरी हुई है, रूस के लिए एक स्वाभाविक साझेदार बन सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में रूस ने भारत के लिए रोजगार के कोटे को सीमित रखा था। लेकिन अब वह इस सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रहा है ताकि अधिक से अधिक भारतीय वहां काम कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास योजनाओं के चलते विदेशी श्रमिकों की भूमिका और अहम हो गई है। भारत से आने वाले इंजीनियर, डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन और अन्य पेशेवर रूस की श्रम शक्ति को नई दिशा दे सकते हैं।
भारत सरकार भी इस संभावित समझौते को लेकर सकारात्मक रुख में है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली का मानना है कि यह समझौता भारतीय युवाओं के लिए विदेशों में रोजगार के नए अवसर खोलेगा। साथ ही यह भारत-रूस के द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूती देगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह डील सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में रूस में काम करने वाले भारतीयों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो सकती है। अभी रूस में सीमित संख्या में भारतीय प्रोफेशनल काम कर रहे हैं, जिनमें आईटी विशेषज्ञ और मेडिकल प्रोफेशनल शामिल हैं।
रूस की जनसंख्या घटने के पीछे कई कारण हैं — कम जन्मदर, वृद्ध आबादी और युवाओं का विदेश पलायन। इन परिस्थितियों में भारत जैसे देश से कुशल मानव संसाधन मिलना रूस के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। वहीं, भारत के लिए यह समझौता रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करेगा, खासकर उन युवाओं के लिए जो विदेश में काम करने के इच्छुक हैं।
भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रिश्ते हैं, जो रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और विज्ञान के क्षेत्र में मजबूत होते आए हैं। अब इन संबंधों में “मानव संसाधन सहयोग” का नया आयाम जुड़ सकता है।
पुतिन की यात्रा के दौरान अन्य कई अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी, जिनमें रक्षा सहयोग, ऊर्जा निवेश और आर्कटिक क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाएं शामिल हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार संबंधी यह डील इस यात्रा का सबसे मानवीय और ऐतिहासिक पहलू साबित हो सकता है।
अगर यह समझौता होता है, तो रूस में भारतीय श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए एक समर्पित तंत्र स्थापित किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारतीय कामगारों को न केवल रोजगार मिले, बल्कि उन्हें सुरक्षा और सम्मान भी प्राप्त हो।
भारत और रूस के बीच यह संभावित समझौता दोनों देशों के बीच “विश्वसनीय साझेदारी” का प्रतीक होगा। आने वाले वर्षों में यह कदम दोनों देशों के आर्थिक और मानवीय संबंधों को और गहरा करेगा, साथ ही लाखों भारतीय युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसरों के द्वार खोलेगा।







