इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। हवा में घुलते ज़हर के बीच रविवार को इंडिया गेट पर अभिभावकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ‘हमारे बच्चों को स्वच्छ हवा दो’ और ‘क्लीन एयर नाउ’ जैसे नारों के साथ सैकड़ों लोग इंडिया गेट के पास इकट्ठा हुए और प्रदूषण के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे, जो मास्क पहनकर आए थे।
लेकिन कुछ देर बाद यह प्रदर्शन प्रशासन के निशाने पर आ गया। बढ़ती भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की और कई लोगों को हिरासत में लिया। हालांकि कुछ घंटों बाद सभी को छोड़ दिया गया, लेकिन इस कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, “दिल्ली में स्वच्छ हवा की मांग करने वाले नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। यह लोकतंत्र नहीं, डर और दमन की राजनीति का उदाहरण है। स्वच्छ हवा में सांस लेना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और सरकार को इस दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए।”
राहुल गांधी ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग अपने और अपने बच्चों के स्वास्थ्य के लिए आवाज उठा रहे हैं, और सरकार उन्हें रोक रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण अब केवल दिल्ली की नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत की समस्या बन चुका है और केंद्र को राज्यों के साथ मिलकर ठोस एक्शन प्लान बनाना चाहिए।
इस घटना के बाद कांग्रेस नेताओं समेत कई विपक्षी दलों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “जो लोग अपने बच्चों के फेफड़ों की चिंता में सड़कों पर निकले हैं, उनके साथ ऐसा बर्ताव शर्मनाक है। सरकारें बयान देती हैं लेकिन वास्तविक कार्रवाई कहीं नहीं दिखती।”
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन बिना पूर्व अनुमति के आयोजित किया गया था और भीड़ बढ़ने से सुरक्षा को खतरा हो सकता था। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी प्रदर्शनकारियों को औपचारिक कार्रवाई के बाद रिहा कर दिया गया है।
इंडिया गेट पर हुए इस विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई वीडियो में मासूम बच्चों को तख्तियां पकड़े हुए देखा जा सकता है जिन पर लिखा है—“हमें साफ हवा चाहिए”, “हम बीमार नहीं होना चाहते”, “सरकार जागो”। लोगों ने कहा कि यह प्रदर्शन किसी राजनीतिक मकसद से नहीं बल्कि मानवता और आने वाली पीढ़ी की सेहत के लिए था।
दिल्ली में इस समय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 के पार पहुंच चुका है, जो “गंभीर” श्रेणी में आता है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह स्तर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। राजधानी के कई स्कूलों को बंद करना पड़ा है और सरकार ने कई निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली जलाना जिम्मेदार नहीं है, बल्कि दिल्ली के भीतर वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और धूल भी बड़े कारण हैं। उनका मानना है कि सरकार को शॉर्ट टर्म उपायों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक नीति अपनानी चाहिए, जिसमें सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, हरित क्षेत्र बढ़ाना और औद्योगिक उत्सर्जन पर कड़ी निगरानी शामिल हो।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र और दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा है कि राजधानी में प्रदूषण की स्थिति साल दर साल क्यों बिगड़ती जा रही है। अदालत ने दोनों सरकारों से कहा है कि वे राजनीति छोड़कर संयुक्त रूप से ठोस समाधान पेश करें।
राहुल गांधी का बयान इस समय देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके शब्दों में, “स्वच्छ हवा की मांग करना अपराध नहीं, यह हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।” उन्होंने सरकारों से अपील की है कि वे पर्यावरण को राजनीति से ऊपर रखकर ईमानदारी से काम करें, क्योंकि अगर हवा ही सांस लेने लायक नहीं रही तो विकास के सारे वादे व्यर्थ हो जाएंगे।







