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  • अनंत प्रकाश येरंकोल्लू: कला, परंपरा और समर्पण से गढ़ी पाँच पीढ़ियों की स्वर्णिम विरासत

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    जीवन में सफलता उन्हें ही मिलती है—
    जो अपने सपनों को कर्म, लगन और निष्ठा से आकार देते हैं।

    कुछ लोग अपने करियर खुद चुनते हैं,
    लेकिन कुछ लोगों को उनका कर्मक्षेत्र…
    “परंपरा की अमूल्य धरोहर” के रूप में मिलता है।

    ऐसे ही एक प्रेरणादायी कलाकार और उद्यमी हैं—
    अनंत प्रकाश येरंकोल्लू,
    Owner – Rekha Arts,
    सोलापुर।

    जो पाँच पीढ़ियों से चली आ रही
    अपनी विरासत को आज भी उसी प्रेम, दक्षता और गर्व के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

    अनंत जी कहते हैं—
    “मैं इस व्यवसाय में अपने आजोबा की वजह से आया…
    यह हमारा पिढ़ीजात व्यवसाय है, और मैं इसकी पाँचवीं पीढ़ी।”

    उनके आजोबा कै. दत्तात्रय केशव येरंकोल्लू एक महान कलाकार थे।
    उन्होंने प्रभात फिल्म इंडस्ट्री सहित कई प्रतिष्ठित फ़िल्म निर्माण संस्थानों में कार्य किया।
    यहीं से कला की ज्योति इस परिवार में और अधिक प्रज्वलित हुई।

    परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी,
    लेकिन कला—
    हमेशा सबसे बड़ी पूँजी रही।

    1948 में स्थापित व्यवसाय आज भी मजबूती से खड़ा है—
    और पिछले 25 वर्षों से इसे अनंत जी संभाल रहे हैं।

    अनंत जी ने केवल 10 वर्ष की उम्र में
    अपने आजोबा से कला के गुर सीखना शुरू किया।

    12वीं के बाद वे कला शिक्षक बने,
    लेकिन भीतर की विरासत उन्हें पुकारती रही…
    अंततः 21 वर्ष की उम्र में वे पूरी तरह इस व्यवसाय में उतर गए।

    उनकी कला केवल काम नहीं—
    एक साधना है।

    आज Rekha Arts से तैयार होती हैं—

    • चाँदी व सोने की मूर्तियाँ
    • मंदिरों के मुकुट
    • त्रिशूल, तलवार, गदा
    • मूर्तियों की प्रभावळ
    • चाँदी के मंदिर दरवाज़े
    • और विशेष धार्मिक–आध्यात्मिक वस्तुएँ

    हर वस्तु कस्टमाइज़्ड,
    हर डिज़ाइन अनूठा,
    और हर निर्मिति आस्था का प्रतीक

    उनका काम आज—

    ✓ पूरे महाराष्ट्र में
    ✓ कर्नाटक
    ✓ आंध्रप्रदेश
    ✓ गोवा
    ✓ तथा विदेशी ग्राहकों तक पहुँच चुका है।

    कला का मार्ग कभी सरल नहीं होता—
    अनंत जी के जीवन में भी कई कठिन दौर आए।

    • आर्थिक उतार–चढ़ाव
    • ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाएँ
    • कच्चे माल की बढ़ती कीमतें
    • समय की चुनौती
    • और कला को टिकाए रखने का दायित्व

    लेकिन उन्होंने हर बार परिस्थिति पर जीत हासिल की।
    परंपरा को न टूटने देने का संकल्प ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

    अनंत जी की कहानी साबित करती है—
    कि कला केवल हाथ से नहीं,
    दिल से पैदा होती है।

    75+ वर्षों से चले आ रहे इस व्यवसाय को
    अनंत जी ने न केवल संभाला है,
    बल्कि आधुनिक समय की ज़रूरतों के अनुसार संवारा भी है।

    पाँच पीढ़ियों के इस सफर में—
    गर्व, मेहनत और कला…
    तीनों बराबर साथ चलते रहे।

    उनकी मेहनत, कला और उत्कृष्ट कार्य को विशेष पहचान मिली है —

    • Maharashtra Business Icon 2025
    • Maharashtra Style Icon 2025
    • Maharashtra Fashion Icon 2025

    इन प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स के लिए
    अनंत प्रकाश येरंकोल्लू का चयन किया गया है।

    यह सम्मान प्रदान कर रहे हैं—

    Reseal.in और India Fashion Icon Magazine,
    जो महाराष्ट्र के उभरते उद्यमियों, कलाकारों और निर्माताओं को गौरव देते हैं।

    यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं,
    बल्कि पूरे सोलापुर और महाराष्ट्र के लिए गर्व का क्षण है।

    अनंत जी की कहानी हम सबको एक सीख देती है—

    मेहनत + परंपरा + समर्पण = जीवन की वास्तविक सफलता

    अनंत प्रकाश येरंकोल्लू सचमुच एक अद्भुत उदाहरण हैं—
    कि यदि संकल्प मजबूत हो,
    तो कला की चमक पीढ़ियों तक उजाला फैलाती है।

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