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केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ नामक योजना को ₹10,000 करोड़ के कोष के साथ मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को और अधिक सशक्त बनाना है।
यह योजना स्टार्टअप इंडिया पहल का अगला चरण है और पहली बार 2016 में शुरू किये गए फंड ऑफ फंड्स स्कीम के सफल उपयोग के बाद इसे फिर से लागू किया गया है। सरकार ने इसे संयुक्त बजट 2025-26 में शामिल किया था।
क्या है इसका मकसद?
यह योजना मुख्य रूप से उन स्टार्टअप्स को मदद करेगी जिन्हें दीर्घकालिक पूंजी की आवश्यकता होती है — जैसे कि डीप-टेक (गहन तकनीक), नवाचार-आधारित विनिर्माण, और शुरुआती चरण में सफलता पाने वाली कंपनियां।
सरकार का उद्देश्य है कि उद्यम पूंजी (वेंचर कैपिटल) में बढ़ोतरी हो और घरेलू निवेश से युवा नवप्रवर्तकों (उद्यमियों) को जोखिम-भरे विचारों में निवेश करने का अवसर मिले।
इस योजना के तहत पैसा सीधे स्टार्टअप्स में नहीं जाता है, बल्कि SEBI-पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs) को दिया जाता है, जो आगे इन फंड्स को स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं।
देश के स्टार्टअप्स को मिलेगा लाभ
भारत में अब तक 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को आधिकारिक तौर पर मान्यता मिली है। ये कंपनियां डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, शिक्षा और अन्य कई क्षेत्रों में काम कर रही हैं। नई फंडिंग से इन स्टार्टअप्स को और पैसा, और अवसर और विकास का मार्ग मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम नवाचार, नौकरी सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पूंजी की कमी नए विचारों को आगे बढ़ने से रोकती है।






