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छोटे से कस्बे से निकलकर अपने दम पर पहचान बनाने वाले Pandurang Eknath More की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। आज उनका Shri Eye Care सेंटर लोगों को बेहतर नेत्र चिकित्सा सेवाएं दे रहा है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था।
सरकारी नौकरी का सपना
Pandurang More के पिता सरकारी अस्पताल में कार्यरत थे और उनकी इच्छा थी कि उनका बेटा भी Ophthalmic Officer बने। इसी उद्देश्य से Pandurang ने Diploma in Optometry किया।
डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी का इंतजार किया, लेकिन लंबे समय तक कोई वैकेंसी नहीं निकली। ऐसे में उन्होंने समय व्यर्थ न गंवाते हुए पार्ट-टाइम जॉब करते हुए आई केयर और ऑप्टिकल इंडस्ट्री में अनुभव हासिल करना शुरू किया।
विदेश जाने का बड़ा फैसला
करीब 6 साल तक अनुभव लेने के बाद भी जब स्थिति नहीं बदली, तो उन्होंने विदेश में काम करने का निर्णय लिया। एक दिन Indian Optician में विज्ञापन देखकर उन्होंने तुरंत अपना CV अफ्रीका भेज दिया।
कुछ ही घंटों में उन्हें इंटरव्यू के लिए मुंबई बुलाया गया, जहां उनका चयन हो गया। उन्हें $1000 सैलरी के साथ रहने, खाने और अन्य सुविधाएं मिलीं, जिससे उनके करियर को नई दिशा मिली।
चुनौतियों से भरा विदेश अनुभव
अफ्रीका में काम के दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। शुरुआती 9 महीनों तक उन्हें वेतन नहीं मिला। इस कठिन समय में उन्होंने भारतीय दूतावास की मदद ली और अपना बकाया वेतन प्राप्त किया।
इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा विदेश जाकर अपना कॉन्ट्रैक्ट पूरा किया। वहां उन्होंने स्थानीय अस्पताल में भी काम किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्राप्त किया।
भारत लौटकर शुरू किया खुद का व्यवसाय
विदेश में अनुभव हासिल करने के बाद Pandurang More ने भारत लौटकर अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। लगभग 6 महीनों की तैयारी के बाद उन्होंने 10 जून 2014 को Shri Eye Care की स्थापना की।
शुरुआत में कई चुनौतियां आईं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी मेहनत और सेवा भाव ने लोगों का भरोसा जीत लिया।
पत्नी का मजबूत साथ
Pandurang More अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी Dr. Jayshree More को देते हैं। वे दोनों मिलकर आज इस क्लिनिक का संचालन करते हैं। हर कठिन परिस्थिति में उनकी पत्नी ने उनका साथ दिया, जिससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ।
आज एक सफल पहचान
आज Shri Eye Care क्षेत्र में एक भरोसेमंद नाम बन चुका है, जहां मरीजों को बेहतर इलाज और सेवा मिलती है।
प्रेरणादायक सफर
Pandurang More की कहानी यह सिखाती है कि अगर इंसान में दृढ़ संकल्प और मेहनत करने का जज्बा हो, तो वह किसी भी परिस्थिति को अपने पक्ष में बदल सकता है।
उनका यह सफर न केवल एक सफल व्यवसाय की कहानी है, बल्कि यह उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।








