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  • बेंगलुरु में 50 लाख की सैलरी भी पड़ रही हल्की! वायरल पोस्ट ने सोशल मीडिया पर छेड़ी बहस।

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    बेंगलुरु की बढ़ती कॉस्ट ऑफ लिविंग पर वायरल हुई पोस्ट ने सोशल मीडिया पर छेड़ दी बहस — क्या अब 50 लाख भी काफी नहीं?

    बेंगलुरु, 12 जून 2025: महंगाई के इस दौर में जहां लोगों को अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी की तलाश है, वहीं बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में 50 लाख रुपये सालाना की सैलरी भी कम पड़ने लगी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि बेंगलुरु में 50 लाख रुपये सालाना कमाना अब 25 लाख के बराबर है।

    वायरल पोस्ट में क्या कहा गया?
    टेक इंडस्ट्री से जुड़े यूजर सौरभ दत्ता ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “मैंने सुना है बेंगलुरु के आईटी सेक्टर में कई लोग 50 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। या तो वे CTC बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं या फिर 50 लाख अब 25 लाख के बराबर हो गया है।”

    सौरभ के इस ट्वीट पर हजारों कमेंट्स और शेयर हो चुके हैं। पोस्ट ने कॉस्ट ऑफ लिविंग (जीवन यापन की लागत) को लेकर एक बड़ा डिबेट छेड़ दिया है।

    यूजर्स की प्रतिक्रियाएं
    एक यूजर ने कमेंट किया: “बेंगलुरु में रहने की लागत इतनी बढ़ गई है कि 50 लाख की सैलरी भी 10 लाख जैसी लगती है।”

    एक और ने कहा: “अगर आप बेंगलुरु में 1 करोड़ रुपये सालाना नहीं कमा रहे हैं, तो ये समय की बर्बादी है।”

    वहीं, कुछ यूजर्स ने सौरभ की सोच को ‘जनरलाइजेशन‘ कहकर खारिज किया। एक यूजर ने लिखा: “क्या आप 2005, 2015 या 2020 के 50 लाख से तुलना कर रहे हैं? बेसलाइन तय होनी चाहिए।”

    बेंगलुरु में क्यों बढ़ रही है महंगाई?
    बेंगलुरु, जिसे भारत की टेक कैपिटल माना जाता है, वहां पर:
    १. रेंट में तेजी से बढ़ोतरी हुई है
    २. स्कूल और हॉस्पिटल की फीस में इजाफा
    ३. रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च कई गुना
    ४. ट्रैफिक और समय की बर्बादी से भी लोग परेशान
    इन सब कारणों की वजह से उच्च सैलरी के बावजूद सेविंग्स करना मुश्किल होता जा रहा है।

    CTC बनाम टेक होम सैलरी की सच्चाई
    एक यूजर ने लिखा: “Microsoft जैसी कंपनियां 50 LPA का पैकेज देती हैं, लेकिन बेस सैलरी सिर्फ ₹16 लाख होती है। बाकी स्टॉक्स (RSUs) होते हैं, जिनका वैल्यू वेस्टिंग शेड्यूल और शेयर मार्केट पर निर्भर करता है।”

    यानी, 50 लाख की सैलरी का टेक होम हिस्सा बहुत कम होता है, जो महंगाई में जीने के लिए पर्याप्त नहीं होता।

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