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  • वित्त मंत्रालय के एक बयान से क्यों धड़ाम हुआ पेटीएम का शेयर, 10% की बड़ी गिरावट।

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    वित्त मंत्रालय की तरफ से ‘एमडीआर लागू नहीं होगा’ कहने पर पेटीएम का शेयर 10% तक गिर गया, जानें पूरी खबर।

    पेटीएम के निवेशकों के लिए गुरुवार का दिन किसी झटके से कम नहीं रहा। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) को लेकर जारी एक बयान के बाद, पेटीएम के शेयरों में 10% तक की गिरावट दर्ज की गई

    गुरुवार को बीएसई (BSE) पर पेटीएम का शेयर 6.13% टूटकर ₹901.30 पर बंद हुआ। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बना सरकार का वह बयान, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि यूपीआई ट्रांजेक्शन पर कोई भी एमडीआर लागू नहीं होगा।

    वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?
    दरअसल, बीते दिनों एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सरकार बैंकों और पेमेंट सॉल्यूशंस प्रोवाइडर को राहत देने के लिए ₹3000 या उससे ज्यादा के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर लगाने पर विचार कर रही है। इस अफवाह के चलते पेटीएम के शेयर बुधवार को ₹978 तक पहुंच गए थे, लेकिन जैसे ही 11 जून को वित्त मंत्रालय का स्पष्टीकरण आया, कि “यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर नहीं लगेगा“, बाजार में निवेशकों की धड़कनें तेज़ हो गईं।

    मंत्रालय ने साफ कहा कि “यूपीआई ट्रांजेक्शन पर किसी प्रकार का एमडीआर चार्ज लागू करने की कोई योजना नहीं है। इस संबंध में चल रही सभी रिपोर्ट भ्रामक और तथ्यहीन हैं।”

    क्यों असर पड़ा पेटीएम पर?
    वन97 कम्युनिकेशंस, पेटीएम की मूल कंपनी है। पेटीएम की सेवाओं का बड़ा हिस्सा यूपीआई और डिजिटल पेमेंट्स पर आधारित है। अगर एमडीआर लागू होता तो कंपनी को रेवेन्यू बढ़ाने का अवसर मिलता। लेकिन सरकार की तरफ से एमडीआर से इनकार के बाद निवेशकों को कमाई की संभावनाएं घटती नजर आईं, और उन्होंने तेजी से शेयर बेचने शुरू कर दिए।

    शेयर इतिहास पर एक नजर
    तिथि                                  पेटीएम शेयर मूल्य
    17 दिसंबर 2024                     ₹1063
    11 जून 2025 (स्पाइक)            ₹978
    12 जून 2025 (गिरावट)           ₹901.30
    12 जून 2024                           ₹376.85

    एमडीआर क्या होता है?
    मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह फीस होती है जो बैंक मर्चेंट्स से पेमेंट प्रोसेसिंग के बदले वसूलते हैं। साल 2020 में सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए एमडीआर को खत्म कर दिया था। हालांकि, 2025 में पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने इसे फिर से लागू करने की मांग की थी।

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