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दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक अपने अभिनय की छाप छोड़ चुके सुपरस्टार जूनियर एनटीआर ने हाल ही में एक बड़े प्रोजेक्ट से किनारा कर लिया है, जिसने पूरे फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनटीआर ने एस.एस. राजामौली के बेटे कार्तिक राजामौली के निर्देशन में बनने वाली बहुप्रतीक्षित बायोपिक “दादासाहेब फाल्के” से खुद को अलग कर लिया है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के के जीवन पर आधारित बताई जा रही थी।
सूत्रों की मानें तो जूनियर एनटीआर का फिल्म से बाहर होना किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई पेशेवर और व्यक्तिगत कारणों का परिणाम है। बताया जा रहा है कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट को लेकर एनटीआर पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। अभिनेता की टीम ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उन्हें अपनी वर्तमान प्रतिबद्धताओं — खासकर निर्देशक प्रशांत नील के साथ आने वाली एक्शन फिल्म और निर्देशक कोराटाला शिवा की अगली परियोजना — पर ध्यान केंद्रित करना है।
इसके अलावा, इस फिल्म का शेड्यूल भी जूनियर एनटीआर के लिए बड़ी चुनौती बन रहा था। सूत्र बताते हैं कि “दादासाहेब फाल्के” बायोपिक को दो भाषाओं – हिंदी और तेलुगू – में एक साथ शूट करने की योजना थी, जिसके लिए लगभग एक साल की लंबी शूटिंग तय की गई थी। एनटीआर के पास इतने लंबे समय तक खुद को एक ही प्रोजेक्ट में बांधना संभव नहीं था।
इसी बीच खबर आई है कि अब यह बड़ा प्रोजेक्ट प्रभास के पास जा सकता है। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का दावा है कि फिल्म के निर्माता डीवीवी दानय्या ने प्रभास को इस बायोपिक के लिए अप्रोच किया है। प्रभास पहले से ही कई बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं, लेकिन इस फिल्म की कहानी और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए उन्होंने इस ऑफर में दिलचस्पी दिखाई है। अगर प्रभास इस फिल्म को साइन करते हैं, तो यह उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक मानी जाएगी।
फिल्म “दादासाहेब फाल्के” का निर्देशन एस.एस. राजामौली के बेटे कार्तिक राजामौली करने वाले हैं, जो अपने पिता की तरह भव्य और भावनात्मक कहानी कहने की शैली के लिए पहचाने जाते हैं। यह उनका निर्देशन डेब्यू होगा, और उन्होंने इस फिल्म की स्क्रिप्ट पर लगभग तीन साल तक काम किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म का बजट करीब 400 करोड़ रुपये का रखा गया है और इसे पैन इंडिया रिलीज़ के लिए तैयार किया जाएगा।
जूनियर एनटीआर और एस.एस. राजामौली का रिश्ता हमेशा से खास रहा है। दोनों ने साथ में “आरआरआर” जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दी, जिसने भारतीय सिनेमा का गौरव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही थी कि एनटीआर राजामौली के बेटे की पहली फिल्म में नजर आएंगे। लेकिन अब इस फैसले ने उनके प्रशंसकों को चौंका दिया है।
फिल्म से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि “एनटीआर ने बहुत सोच-समझकर यह फैसला लिया है। वह नहीं चाहते थे कि किसी जल्दबाजी में की गई स्क्रिप्ट के कारण फिल्म का प्रभाव कम हो जाए। वह भविष्य में भी राजामौली परिवार के साथ काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इस प्रोजेक्ट में फिलहाल वह फिट नहीं बैठ रहे थे।”
अगर प्रभास इस फिल्म में साइन करते हैं, तो यह उनकी पहले से घोषित फिल्मों “स्पिरिट” और “कल्कि 2898 एडी” के बाद एक और बड़ी ऐतिहासिक फिल्म होगी। प्रभास के लिए यह किरदार पूरी तरह अलग चुनौती पेश करेगा क्योंकि यह रोल किसी फिक्शनल कैरेक्टर का नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा के प्रथम निर्माता दादासाहेब फाल्के का है, जिनकी कहानी भारतीय फिल्म इतिहास की आत्मा कही जाती है।
फिल्म समीक्षकों का कहना है कि “दादासाहेब फाल्के” बायोपिक भारतीय सिनेमा के विकास और संघर्ष के उस दौर को दिखाएगी जब तकनीक, संसाधन और समाजिक समर्थन का अभाव था। दादासाहेब फाल्के ने 1913 में भारत की पहली फुल-लेंथ फीचर फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ बनाकर इतिहास रचा था। ऐसे में इस किरदार को पर्दे पर निभाना किसी भी अभिनेता के लिए गर्व और चुनौती दोनों है।
मनोरंजन जगत में यह खबर अब सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गई है। कुछ प्रशंसक निराश हैं कि जूनियर एनटीआर ने यह मौका खो दिया, वहीं कुछ का मानना है कि प्रभास जैसे अभिनेता इस भूमिका के लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकते हैं क्योंकि उन्होंने पहले भी “बाहुबली” जैसी फिल्मों में ऐतिहासिक किरदारों को शानदार तरीके से निभाया है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रभास आधिकारिक रूप से “दादासाहेब फाल्के” बायोपिक को साइन करते हैं या नहीं। अगर ऐसा होता है, तो यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी बायोपिक में से एक साबित हो सकती है।








