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  • गुजरात में चार साल बाद फिर लौटी सीएम-डिप्टी सीएम की जोड़ी, भूपेंद्र पटेल संग हर्ष संघवी बने इतिहास — जानिए क्या है ये अनूठा संयोग

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    गुजरात की राजनीति में एक बार फिर ऐतिहासिक पल दर्ज हो गया है। चार साल बाद राज्य को फिर से एक मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की जोड़ी मिल गई है। भूपेंद्र पटेल सरकार में हुए हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने युवा और ऊर्जावान नेता हर्ष संघवी को उप मुख्यमंत्री के पद की जिम्मेदारी सौंपी है। इस घोषणा के साथ ही गुजरात में न केवल राजनीतिक समीकरण बदले हैं, बल्कि एक अनूठा संयोग भी सामने आया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

    हर्ष संघवी, जो सूरत से विधायक हैं, अब तक राज्य सरकार में गृह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर अपनी सख्त और सक्रिय कार्यशैली के लिए जाने जाते रहे हैं। उनकी सादगी और जनसंपर्क की क्षमता ने उन्हें जनता के बीच एक लोकप्रिय चेहरा बना दिया है। अब जब वे भूपेंद्र पटेल सरकार में डिप्टी सीएम बने हैं, तो वे गुजरात के सबसे कम उम्र के उप मुख्यमंत्री का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर चुके हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी का यह कदम न केवल युवाओं को संदेश देने वाला है, बल्कि पार्टी के अंदर नई पीढ़ी को नेतृत्व देने की दिशा में एक बड़ा संकेत भी है। 39 वर्षीय हर्ष संघवी के राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से हुई थी, और उन्होंने बहुत कम समय में पार्टी संगठन में मजबूत पकड़ बना ली। सूरत जैसे व्यावसायिक शहर से आने वाले हर्ष संघवी ने युवाओं और व्यापारियों दोनों वर्गों के बीच एक सेतु का काम किया है।

    इससे पहले विजय रूपाणी और नितिन पटेल की जोड़ी गुजरात में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के रूप में देखी गई थी। सितंबर 2021 में जब भूपेंद्र पटेल ने मुख्यमंत्री पद संभाला, तब डिप्टी सीएम का पद खाली रखा गया था। अब चार साल बाद बीजेपी ने इस पद को भरकर एक संतुलित और समन्वित नेतृत्व देने का संकेत दिया है।

    भूपेंद्र पटेल और हर्ष संघवी की जोड़ी कई मायनों में खास है। दोनों नेता संगठन से निकले हैं, दोनों का स्वभाव शांत और कार्यकुशलता पर आधारित है। जहां भूपेंद्र पटेल को उनकी स्थिर और संतुलित प्रशासनिक दृष्टि के लिए जाना जाता है, वहीं हर्ष संघवी तेज़ निर्णय लेने वाले और जमीनी स्तर पर सक्रिय नेता माने जाते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह संयोजन बीजेपी की आगामी रणनीति का हिस्सा है। अगले कुछ वर्षों में गुजरात में कई बड़े प्रोजेक्ट पूरे होने हैं और साथ ही लोकसभा चुनाव की तैयारी भी अपने चरम पर है। ऐसे में एक युवा चेहरा पार्टी को नई ऊर्जा देने का काम करेगा।

    हर्ष संघवी की नियुक्ति से पार्टी के भीतर भी जोश का माहौल है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि इससे संगठन में “युवा नेतृत्व को प्रोत्साहन” मिलेगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि यह कदम बीजेपी की “इमेज रिफ्रेश” करने की कोशिश है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसे “चुनावी रणनीति का हिस्सा” बताया है।

    राज्य के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब युवा नेता को इतने ऊंचे पद पर बैठाया गया हो, लेकिन हर्ष संघवी की खासियत यह है कि उन्होंने अपनी कार्यशैली से वरिष्ठ नेताओं का भरोसा जीता है। सूरत में कानून व्यवस्था सुधारने, सड़क सुरक्षा अभियान चलाने और युवाओं को नशामुक्ति की दिशा में प्रेरित करने जैसे कामों ने उन्हें एक “एक्शन-ओरिएंटेड” नेता के रूप में स्थापित किया है।

    दिलचस्प बात यह है कि गुजरात में मुख्यमंत्री-उप मुख्यमंत्री की जोड़ी हमेशा राजनीतिक रूप से अहम भूमिका निभाती रही है। चाहे वह आनंदीबेन पटेल के बाद विजय रूपाणी और नितिन पटेल की जोड़ी हो या अब भूपेंद्र पटेल और हर्ष संघवी की नई जोड़ी — हर बार बीजेपी ने संतुलन और अनुभव के साथ युवा ऊर्जा का मेल दिखाया है।

    राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी आने वाले समय में हर्ष संघवी को गुजरात की राजनीति में और बड़ी भूमिका दे सकती है। उनकी नियुक्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की मंजूरी से जोड़ा जा रहा है। दोनों ही नेता गुजरात से हैं और राज्य की राजनीति में हर कदम रणनीतिक तौर पर सोच-समझकर उठाया जाता है।

    बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, हर्ष संघवी को यह जिम्मेदारी न केवल उनके प्रदर्शन के कारण मिली है, बल्कि संगठन के भीतर उन्हें एक भरोसेमंद और परिणाम देने वाला नेता माना जाता है। उनकी छवि एक “क्लीन और डायनेमिक पॉलिटिशियन” की है, जो पार्टी की नई छवि को और मजबूत करेगी।

    गुजरात की जनता भी इस फैसले का स्वागत करती नजर आ रही है। सोशल मीडिया पर “#HarshSanghvi” और “#GujaratLeadership” ट्रेंड कर रहे हैं। समर्थकों ने उन्हें “युवा गुजरात का चेहरा” कहा है।

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