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देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों को अब एक मेगा आंदोलन का रूप देने का ऐलान किया है। पार्टी ने दावा किया है कि उसने पूरे देश के कोने-कोने से 5 करोड़ नागरिकों के हस्ताक्षर जुटाए हैं, जो उनके इस अभियान की गंभीरता को दर्शाता है। कांग्रेस अब इन हस्ताक्षरों के साथ दिल्ली कूच करेगी और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह पहल कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह जनता को सीधे अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में इस अभियान को देशभर में फैलाया गया। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतंत्र की सुरक्षा को लेकर जनता की राय को सरकार तक पहुंचाना बताया गया है।
कांग्रेस का आरोप है कि बीते कुछ चुनावों में बड़े पैमाने पर ईवीएम (EVM) में गड़बड़ी, फर्जी वोटिंग और मतदाता सूची में हेराफेरी जैसे मामले सामने आए हैं। पार्टी का कहना है कि ये घटनाएं लोकतंत्र की जड़ें कमजोर कर रही हैं, और जनता के विश्वास को चोट पहुंचा रही हैं।
“यह केवल कांग्रेस का नहीं, बल्कि पूरे देश के मतदाताओं का मुद्दा है,” राहुल गांधी ने हाल ही में एक जनसभा में कहा था। उन्होंने आगे कहा कि वोट चोरी का मतलब सिर्फ सीटें चुराना नहीं है, बल्कि यह जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिश है।
पार्टी के इस हस्ताक्षर अभियान को “जनमत की पुकार” नाम दिया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में इस अभियान को गांव-गांव, शहर-शहर तक पहुंचाया गया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया और ईवीएम पारदर्शिता, चुनाव आयोग की भूमिका, और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर चर्चा की।
पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बताया कि यह अभियान अब अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही दिल्ली में एक विशाल मार्च निकाला जाएगा। मार्च के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ेंगे, जहां वे राष्ट्रपति से निवेदन करेंगे कि “देश के लोकतंत्र की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।”
दिल्ली पुलिस और प्रशासन भी इस संभावित मार्च के लिए सतर्क हो गया है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है, क्योंकि पार्टी का दावा है कि इस मार्च में देशभर से हजारों कार्यकर्ता शामिल होंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह अभियान कांग्रेस के लिए 2026 के आम चुनावों से पहले जनता के बीच विश्वसनीयता और सक्रियता दिखाने का एक बड़ा प्रयास है। इससे कांग्रेस अपने विरोधियों को यह संदेश देना चाहती है कि वह अब सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ के रूप में मैदान में उतर चुकी है।
वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के इस अभियान को राजनीतिक स्टंट बताया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि “कांग्रेस को अपनी हार के कारण खुद में ढूंढने चाहिए, न कि लोकतंत्र को दोष देने चाहिए।”
हालांकि, कांग्रेस का मानना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए है। पार्टी का दावा है कि उसे इस पहल में कई सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों का भी समर्थन मिल रहा है।
दिल्ली में होने वाले इस प्रदर्शन में देशभर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि ज्ञापन में चुनाव सुधार, मतदान की पारदर्शिता, और ईवीएम के साथ पेपर ट्रेल अनिवार्य करने जैसी मांगें शामिल होंगी।
कांग्रेस का यह कदम न केवल आगामी चुनावों पर असर डाल सकता है, बल्कि यह देश की राजनीतिक बहस को भी नए मोड़ पर ले जा सकता है। पांच करोड़ हस्ताक्षरों के इस जनमत अभियान के ज़रिए पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि वह अब अपनी पुरानी भूमिका से आगे बढ़कर एक जन आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
अब सभी की निगाहें दिल्ली कूच और राष्ट्रपति को सौंपे जाने वाले उस ज्ञापन पर टिकी हैं — जो यह तय करेगा कि क्या कांग्रेस का यह आंदोलन जनता के दिलों तक पहुंच पाता है या फिर यह महज एक राजनीतिक कवायद बनकर रह जाएगा।








