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एमपी हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अतुल श्रीधरन का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया है। उनके विदाई समारोह में न्यायपालिका, वकील और कर्मचारियों के साथ ही कई वरिष्ठ अधिकारी और राजनीतिक प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस अवसर पर जस्टिस श्रीधरन भावुक दिखाई दिए और अपने सात महीने के कार्यकाल में लिए गए कड़क फैसलों पर चर्चा की।
जस्टिस अतुल श्रीधरन ने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे फैसले दिए, जिन्होंने न्यायपालिका और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गहरी छाप छोड़ी। इनमें सबसे चर्चित फैसलों में ‘जज के खिलाफ ही आदेश’, ‘मंत्री पर FIR दर्ज करने के आदेश’ और प्रशासनिक मामलों में स्पष्ट और सख्त रुख शामिल हैं। इन निर्णयों के कारण न्यायालय और जनता में उनके प्रति विश्वास और सम्मान बढ़ा।
विदाई समारोह के दौरान जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि न्यायपालिका का उद्देश्य केवल कानून का पालन सुनिश्चित करना है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी जटिल क्यों न हों। उन्होंने अपने फैसलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी-कभी कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा न्याय और पारदर्शिता को कायम रखना रहा है।
जस्टिस श्रीधरन ने अपने भावुक संबोधन में कहा कि एमपी हाईकोर्ट में कार्य करते हुए उन्होंने अनेक चुनौतीपूर्ण मामलों का सामना किया। इन मामलों में उनकी प्राथमिकता हमेशा न्याय और संविधान के प्रति जिम्मेदारी रही। उन्होंने कहा कि उनके लिए न्यायपालिका केवल पेशा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और सामाजिक सेवा का मार्ग है।
वकीलों और कर्मचारियों ने भी जस्टिस श्रीधरन की तारीफ करते हुए कहा कि उनका न्यायप्रिय रवैया, साहस और स्पष्ट दृष्टिकोण अदालत और न्यायिक प्रक्रिया में नई ऊर्जा लेकर आया। कई वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि श्रीधरन के फैसले और निर्देश आम जनता के अधिकारों की रक्षा में मील का पत्थर साबित हुए।
जस्टिस श्रीधरन ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि न्यायपालिका का आत्मसम्मान और निष्पक्षता सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि कोई भी बाहरी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप न्याय के मार्ग में बाधा नहीं बन सकता। उनके फैसलों ने यह स्पष्ट किया कि कानून और संविधान के तहत न्याय किसी के दबाव में नहीं आता।
एमपी हाईकोर्ट के कर्मचारियों ने जस्टिस श्रीधरन के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका कार्यकाल चाहे छोटा रहा हो, लेकिन उनकी प्रभावशाली और साहसिक निर्णय लेने की शैली लंबे समय तक याद रखी जाएगी। विदाई समारोह में न्यायालय परिसर में भावनाओं का माहौल था, और कई लोग अपनी आंखों में आंसू लिए उन्हें विदा कर रहे थे।
जस्टिस श्रीधरन का ट्रांसफर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगा, जहाँ उनका अनुभव और न्यायिक दृष्टिकोण न्यायपालिका और न्याय प्रक्रिया में नई ऊर्जा लेकर आएगा। वरिष्ठ न्यायाधीशों और वकीलों ने उम्मीद जताई कि उनके नए कार्यस्थल पर भी न्याय और निष्पक्षता की मिसाल कायम रहेगी।
जस्टिस अतुल श्रीधरन का एमपी हाईकोर्ट में कार्यकाल न्यायपालिका में साहस, स्पष्टता और न्यायप्रियता की मिसाल रहा। उनके तीन कड़क फैसलों ने प्रशासन और जनता के बीच न्याय की स्थिति को मजबूत किया। विदाई समारोह में उनके भावुक शब्द और यादगार फैसले न्याय और न्यायपालिका के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।








