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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह बनी है बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तारीफ। थरूर ने आडवाणी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से उन्होंने देश की सेवा की है और उनके योगदान को किसी एक प्रकरण तक सीमित करना अनुचित है। हालांकि, थरूर की यह टिप्पणी कांग्रेस के भीतर कई लोगों को रास नहीं आई और पार्टी ने तुरंत दूरी बना ली।
दरअसल, शशि थरूर ने हाल ही में लालकृष्ण आडवाणी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दी थीं और सोशल मीडिया पर उनके योगदान की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि आडवाणी ने भारत की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उन्हें केवल एक घटना के आधार पर आंकना सही नहीं होगा। थरूर का इशारा स्पष्ट तौर पर 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस की ओर था, जिसके साथ आडवाणी का नाम अक्सर जोड़ा जाता है।
थरूर की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। कई कांग्रेस नेताओं ने इस पर असहमति जताई और कहा कि पार्टी की विचारधारा बीजेपी से बिल्कुल अलग है, ऐसे में इस तरह की प्रशंसा गलत संदेश देती है।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने रविवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि शशि थरूर ने जो कहा, वह उनका व्यक्तिगत बयान है, पार्टी की आधिकारिक राय नहीं। खेड़ा ने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक और उदार पार्टी है, जहां हर सदस्य को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा, “थरूर केंद्रीय कार्य समिति के सदस्य हैं और उन्होंने अपने विचार रखे हैं। यह कांग्रेस की उदार और लोकतांत्रिक संस्कृति को दर्शाता है।”
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि थरूर का यह बयान आने वाले समय में कांग्रेस के भीतर नई बहस को जन्म दे सकता है। पार्टी के भीतर ऐसे कई नेता हैं जो बीजेपी या उसके नेताओं की किसी भी प्रशंसा को वैचारिक रूप से असंगत मानते हैं। वहीं, थरूर का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद किसी व्यक्ति के दीर्घकालिक योगदान को स्वीकार करना ‘राजनीतिक परिपक्वता’ का प्रतीक है।
यह पहली बार नहीं है जब शशि थरूर किसी बयान के कारण विवादों में आए हों। इससे पहले भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा था कि मोदी की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली है। उस समय भी कांग्रेस ने उनके बयान से खुद को अलग कर लिया था।
इस बार भी मामला कुछ ऐसा ही दिख रहा है। थरूर ने आडवाणी के प्रति व्यक्तिगत सम्मान जताया, लेकिन पार्टी की वैचारिक रेखा से उनका रुख कुछ अलग नजर आया। वहीं, बीजेपी नेताओं ने थरूर की बातों का स्वागत किया और कहा कि कम से कम विपक्ष में कुछ ऐसे नेता हैं जो निष्पक्ष होकर सोचते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि शशि थरूर की इस टिप्पणी के कई मायने हैं। एक ओर यह उनके स्वतंत्र सोच की झलक देती है, वहीं दूसरी ओर यह कांग्रेस में मौजूद वैचारिक खींचतान को भी उजागर करती है। जहां कांग्रेस बीजेपी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं थरूर जैसे नेता राजनीति में मर्यादा और सम्मान की बात करते हुए दोनों दलों के बीच एक सौम्य सेतु बनने की कोशिश करते दिखते हैं।
कुल मिलाकर, शशि थरूर का यह बयान कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों ही जगह चर्चा का विषय बन गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस मुद्दे को किस तरह संभालती है और क्या थरूर आगे भी इस तरह के स्वतंत्र विचार प्रकट करते रहेंगे या नहीं।







