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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को घोषणा की कि राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में ‘वन्दे मातरम’ गाने को अनिवार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कदम से छात्रों में देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति गर्व की भावना जागृत होगी।
गोरखपुर में आयोजित ‘एकता यात्रा’ के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान की भावना होना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि यह पहल न केवल गीत के महत्व को बढ़ावा देगी बल्कि छात्रों को सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक करेगी।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के प्रति सम्मान की भावना होनी चाहिए। हम इसे उत्तर प्रदेश के हर स्कूल और शैक्षणिक संस्थान में अनिवार्य करेंगे।”
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश में विभाजनकारी तत्वों की पहचान और उन्हें रोकना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई नया जिन्ना कभी भी भारत में पैदा न हो।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग जाति, भाषा या क्षेत्र के नाम पर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों को समय रहते पहचान कर सामाजिक एकता और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करना जरूरी है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “हमें विभाजनकारी प्रवृत्ति को जड़ से खत्म करना होगा और युवाओं में देशभक्ति की भावना को मजबूती से स्थापित करना होगा।”
इस घोषणा के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 1937 में ‘वन्दे मातरम’ के कुछ महत्वपूर्ण छंद हटाए गए थे। उन्होंने इसे देश में विभाजनकारी मानसिकता का प्रतीक बताया।
कांग्रेस ने पीएम मोदी के बयान पर आपत्ति जताई और माफी की मांग की। कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा कि 1937 में कोलकाता में हुई कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, रवींद्रनाथ टैगोर सहित कई स्वतंत्रता सेनानी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि उस बैठक में ‘वन्दे मातरम’ पर निर्णय रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के अनुसार लिया गया था। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे अपने राजनीतिक विवादों को वर्तमान मुद्दों तक सीमित रखें।
‘वन्दे मातरम’ को सबसे पहले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित किया था। इसके बाद रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्र में प्रस्तुत किया।
यह गीत भारत की स्वतंत्रता संग्राम और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। योगी आदित्यनाथ ने इसे बच्चों और युवाओं के लिए देशभक्ति और नैतिक शिक्षा का माध्यम बताते हुए कहा कि स्कूलों में इसके गायन से छात्रों में समानता, अनुशासन और देशभक्ति की भावना बढ़ेगी।
उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को निर्देश दिया है कि:
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सभी सुबह की प्रार्थना सभाओं और स्कूल के कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम’ का गायन अनिवार्य होगा।
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छात्रों को इसके ऐतिहासिक महत्व और देशभक्ति संदेश से परिचित कराया जाएगा।
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शिक्षकों को इसे पाठ्यक्रम और गतिविधियों में शामिल करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस दिशा-निर्देश का उद्देश्य केवल गीत का गायन नहीं बल्कि छात्रों में राष्ट्रीय भावना और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है।
योगी सरकार का यह कदम राष्ट्रीयता और शिक्षा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इससे राज्य के सभी स्कूलों में बच्चों में देशभक्ति, अनुशासन और नैतिक शिक्षा मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूक करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
शिक्षा के साथ-साथ यह कदम छात्रों में सामाजिक एकता और भारतीयता की भावना को भी प्रोत्साहित करेगा।
उत्तर प्रदेश में ‘वन्दे मातरम’ गाने को अनिवार्य करना एक ऐतिहासिक और देशभक्ति से जुड़े निर्णय है। इससे न केवल छात्रों में राष्ट्रप्रेम जागृत होगा, बल्कि उन्हें भारत के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में भी जानकारी मिलेगी।
योगी आदित्यनाथ की यह पहल राज्य में शिक्षा और राष्ट्रीय मूल्यों को जोड़ने का उदाहरण है और इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।








