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छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित मारेडुमिल्ली के घने जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान लगातार दूसरे दिन भी जारी है। मंगलवार को जिस इलाके में खूंखार नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा को मार गिराया गया था, उसी क्षेत्र में बुधवार को भी सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कड़ी मुठभेड़ हुई। इस नई कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने अब तक 7 नक्सलियों को ढेर कर दिया है, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा 2 एके-47 राइफल सहित कुल 8 हथियार बरामद किए गए हैं।
राज्य के इंटेलिजेंस एडीजी महेश चंद्र लड्डा ने पुष्टि की है कि मंगलवार से चल रहे संयुक्त ऑपरेशन में सात नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी फील्ड से मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि पकड़े गए नक्सलियों की संख्या भी बढ़कर 50 तक पहुंच चुकी है। यह जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता के रूप में मिल रही है, क्योंकि इस क्षेत्र में सक्रिय कई बड़े नक्सली कमांडरों के मारे जाने की संभावना जताई जा रही है। इनमें जोगा उर्फ टेक शंकर और देवजी जैसे कुख्यात नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर उनकी पहचान की प्रक्रिया अभी जारी है।
मारेडुमिल्ली का यह जंगल नक्सलियों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाना माना जाता है। सुरक्षा बलों के अनुसार बुधवार की सुबह लगभग साढ़े छह बजे से ग्रेहाउंड्स और अन्य सुरक्षादल इस इलाके में नक्सलियों को चारों ओर से घेरने में सफल रहे। इसके बाद घेरा टूटने से रोकने के लिए दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई। नक्सलियों ने भी सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध फायरिंग की, लेकिन सुरक्षा बलों ने बेहतर रणनीति के साथ जवाबी कार्रवाई कर बढ़त हासिल कर ली।
मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों ने कुल सात शव बरामद किए—चार पुरुष और तीन महिला नक्सलियों के। मौके से मिले हथियारों और बरामद सामग्री के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मारे गए नक्सलियों में कई लंबे समय से वांछित और बड़े वसूली नेटवर्क चलाने वाले लोग भी शामिल हो सकते हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में हुई इस कार्रवाई ने नक्सल संगठन के दक्षिण बस्तर डिवीजन को भारी नुकसान पहुंचाया है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मंगलवार को हिड़मा के मारे जाने के बाद नक्सलियों में भारी खलबली मची हुई थी। माना जा रहा है कि इसी हड़बड़ाहट में कई शीर्ष नक्सली कमांडर उसी क्षेत्र में ठिकाना बदलने की कोशिश कर रहे थे, जिन पर बुधवार की सुबह सुरक्षा बलों ने धावा बोला। हिड़मा को नक्सलियों के सबसे खतरनाक नेताओं में से एक माना जाता था, और उसके मारे जाने के तुरंत अगले दिन हुए इस बड़े ऑपरेशन ने संगठन को और कमजोर कर दिया है।
मुठभेड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों का ऑपरेशन अभी भी जारी है। इलाके को पूरी तरह घेरकर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि कोई भी नक्सली बचकर भाग न सके। जंगलों में छिपे अन्य नक्सलियों की खोज के लिए ड्रोन और ट्रैकिंग टीमें भी लगाई गई हैं। इस बीच, नक्सलियों के कई ठिकानों से विस्फोटक सामग्री, राशन, वायरलेस सेट और जीवनोपयोगी सामान भी बरामद होने की खबर है।
अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन क्षेत्र में नक्सलियों की शक्ति को गंभीर रूप से कमजोर कर देगा। यदि देवजी और टेक शंकर की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो जाती है तो यह अभियान पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाएगा। सुरक्षा बलों का दावा है कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में और भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है, जिससे नक्सल गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त करने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।
छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सीमा पर जारी यह अभियान फिलहाल पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया है कि देश के सबसे कठिन इलाकों में भी वे नक्सल खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी क्षमता और जोखिम के साथ डटे हुए हैं।







