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राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता (Air Quality Index – AQI) रविवार को फिर से तेज़ गिरावट के साथ ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुँच गई है, जिससे सांस संबंधी परेशानियाँ बढ़ने का खतरा बना हुआ है। यह गिरावट कुछ दिनों पहले मौसम में बेहतर हवाओं के कारण मिली थोड़ी राहत के तुरंत बाद देखी गई है।
AQI आंकड़े और प्रदूषण का स्तर
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार सुबह 8 बजे AQI 298 (खराब) दर्ज हुआ, जो दोपहर तक थोड़ा और बढ़कर 300 तक पहुंच गया।
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24‑घंटे का औसत AQI 307 (बहुत खराब) पर दर्ज किया गया। शाम के समय यह 310 और रात में 304 तक पहुंच गया |
‘बहुत खराब’ श्रेणी का मतलब है कि सांस की समस्याओं वाले लोग, बुज़ुर्ग तथा बच्चे विशेष रूप से अधिक असर महसूस कर सकते हैं। अधिक दिनों तक यह स्थिति बनी रहने पर अन्य नागरिकों में भी स्वास्थ्य संबंधी लक्षण उभर सकते हैं।
कोहरा और मौसम का प्रभाव
दिल्ली में कोहरे और कम हवा की गति ने प्रदूषण को फैलने से रोक दिया है, जिससे धूल और धुएं के कण जमीन के करीब ही स्थिर रहते हैं। इससे शहर की हवा में PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषकों की मात्रा बनी रहती है और AQI खराब स्तर पर दर्ज होता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मौसम विभाग के आँकड़ों के अनुसार, आगामी कुछ दिनों में भी हवा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार जल्द होने की संभावना नहीं है और AQI ‘बहुत खराब’ से ऊपर भी जा सकता है।
यातायात और जीवन पर असर
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प्रदूषण और धुंध के कारण उड़ानों में रद्दीकरण और देरी भी देखने को मिल रही है।
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दृश्यता कम होने से सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो रहा है, जिससे यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को कठिनाइयाँ हो रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में तापमान कम होने, हवा की गति धीमी होने और आसपास के प्रदूषण स्रोतों के एक साथ होने से हवा की गुणवत्ता खराब बनी रहती है। इसके अलावा, वाहन धुएँ, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण धूल इसके मुख्य कारण हैं, जो प्रदूषक तत्वों को और अधिक बढ़ाते हैं।








