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चल रहे विजय हजारे ट्रॉफी 2025‑26 में गोवा टीम के ऑल‑राउंडर अर्जुन तेंदुलकर को ओपनिंग बल्लेबाज़ी में उतारने का निर्णय अब तक टीम के लिए सफल नहीं रहा है। इस प्रयोग ने अपेक्षित परिणाम नहीं दिए हैं और आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
ओपनिंग में निराशाजनक प्रदर्शन
टॉस जीतकर पंजाब के खिलाफ खेले गए मुकाबले में गोवा टीम ने अर्जुन तेंदुलकर को ओपनिंग भूमिका सौंपी, लेकिन वे मात्र 8 गेंदों में 1 रन बना पाए और जल्दी आउट हो गए। पिछले चार मैचों में भी उनका प्रदर्शन औसत से काफी नीचे रहा है।
इससे पहले अर्जुन ने मुंबई के खिलाफ 24 रन, उत्तराखंड के खिलाफ 8 रन और सिखिम के खिलाफ 19 रन बनाए थे, लेकिन ये रन टीम के लिये बड़ा योगदान साबित नहीं हुए।
टेस्ट की रणनीति पर उठे सवाल
गोवा के टीम मैनेजमेंट और कोचिंग स्टाफ ने तेंदुलकर को बल्लेबाज़ी में ऊपर भेजने के निर्णय को एक “बोल्ड” कदम बताया था, लेकिन अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह रणनीति सही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑल‑राउंडर को बल्लेबाज़ी में ऊपरी क्रम देना, खासकर पहले से स्थापित बल्लेबाज़ों की मौजूदगी में, शायद टीम के हित में नहीं रहा।
दूसरी चुनौतियाँ भी हैं मौजूद
विजय हजारे ट्रॉफी में अर्जुन का बल्ला ही नहीं, बल्कि गेंदबाज़ी में भी खास असर नहीं दिखा — उन्हें विकेट लेने में भी सफलता नहीं मिली है। इस सीज़न में गोवा की शुरुआत कुछ हिचकिचाहट भरी रही है, जिससे टीम की स्थिति पर भी असर पड़ा है।
पूर्व अनुभव और आलोचनाएँ
कुछ क्रिकेट विश्लेषक और पूर्व खिलाड़ी मानते हैं कि अर्जुन का भूमिका और कर्डिनेशन सही नहीं रखा गया, जबकि अर्जुन के अदाकारी में उच्च क्षमता है। अय्यर सिंह जैसे अनुभवी कोचों की सलाह रही है कि अर्जुन को उसकी मूल भूमिका के अनुसार खेलने के अवसर दिए जाने चाहिए। हालांकि, टीम प्रबंधन ने फिलहाल अपनी रणनीति नहीं बदली है।
विजय हजारे ट्रॉफी में अन्य प्रदर्शन
टूर्नामेंट में दूसरी ओर कई खेलों में शानदार प्रदर्शन भी देखने को मिला है। टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने इस टूर्नामेंट में अपना 58वाँ लिस्ट‑A शतक जड़ा है, जबकि ऋतुराज गायकवाड़ ने सबसे तेज़ 100 छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी बनाया है।







