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  • मुंबई शिक्षा विभाग डिजिटाइज़ेशन ड्राइव में सबसे आगे

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    महाराष्ट्र में शिक्षा विभाग के स्टाफ के रोजगार रिकॉर्ड को डिजिटाइज करने की दिशा में चल रही राज्यव्यापी पहल में मुंबई शीर्ष पर है, जहाँ लगभग 60% कर्मचारी डेटा अब तक शालार्थ पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। यह जानकारी हाल ही में जारी किये गए आंकड़ों में सामने आई है।

    क्या है यह ड्राइव?

    डिजिटलीकरण अभियान में सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षण तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों के रोजगार दस्तावेजों को ऑनलाइन सिस्टम में अपलोड करने का काम शामिल है। इसमें नियुक्ति आदेश, जॉइनिंग रिपोर्ट, अनुमोदन पत्र और सेवा रिकॉर्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सरकार के शालार्थ पोर्टल पर अपलोड करना आवश्यक है। इस ड्राइव को शिक्षा विभाग ने सितंबर 2025 की 20 तारीख तक पूरा करने का लक्ष्य दिया था।

    मुंबई आगे, कई जिलों में प्रगति अल्प

    जहाँ मुंबई में लगभग 60% रिकॉर्ड तैयार हो चुके हैं, वहीं धुळे, अकोला और सोलापुर जैसे कई जिलों में यह आंकड़ा 1% से भी कम है। इससे स्पष्ट होता है कि डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया राज्य भर में असमान रूप से लागू हो रही है

    यह अभियान विशेष रूप से उन कर्मचारियों पर केंद्रित है जिनकी नियुक्तियाँ 2016 से पहले हुई थीं, जब शालार्थ आईडी बनाना अनिवार्य नहीं था। ऐसे में पुराने रिकॉर्ड आज भी कई स्कूलों और शिक्षा कार्यालयों में केवल कागज़ पर मौजूद हैं, जिससे सत्यापन और ऑडिट की प्रक्रिया जटिल हो जाती है।

    शालार्थ पोर्टल का उद्देश्य

    शालार्थ महाराष्ट्र सरकार का एक केंद्रीकृत ऑनलाइन सिस्टम है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों और स्टाफ के वेतन, सेवा और वित्तीय विवरण को एक ही जगह सुरक्षित रखना है। पिछले कुछ समय में इस पोर्टल की समीक्षा के दौरान की गई अनियमितताओं के कारण पुराने रिकॉर्डों को डिजिटली जोड़ने और प्रोफ़ाइल से लिंक करने का यह अभियान शुरु किया गया था।

    डिजिटलीकरण का लक्ष्य रिकॉर्ड को एकीकृत, सत्यापित और मानकीकृत करना है, ताकि प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता, तत्काल सत्यापन और ऑडिट की प्रक्रियाएँ अधिक सरल और तेज़ हो सकें।

    क्यों है प्रगति असमान?

    जहाँ मुंबई में डिजिटाइजेशन का काम अपेक्षाकृत सुचारू रूप से चल रहा है, वहीं कई जिलों में कर्मचारियों द्वारा रिकॉर्ड अपलोड न होने के कारण प्रगति बहुत धीमी है। इससे यह संकेत मिलता है कि कुछ जिलों में प्रशासन, तकनीकी सहायता या कर्मचारियों की भागीदारी की कमी है।

    डिजिटाइजेशन की यह पहल शिक्षा विभाग के लिए अहम है, क्योंकि इससे न केवल रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर होगा बल्कि भविष्य में वेतन, सेवा और वित्तीय निर्धारण में भी सुव्यवस्था आएगी

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