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पुणे में पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल 2026 (Pune Public Policy Festival-2026) 9 और 10 जनवरी को प्रतिष्ठित गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (GIPE) में आयोजित किया जा रहा है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य विषय “Decoding Technology and Society” रखा गया है, जो प्रौद्योगिकी, सामाजिक बदलाव और राज्य की क्षमता के बीच के बदलते संबंधों पर गहन विचार-मंथन करेगा।
क्या है यह फेस्टिवल?
पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल एक महत्वपूर्ण मंच है जहाँ नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है ताकि वे सार्वजनिक नीति, सामाजिक विकास और तकनीकी प्रगति जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा कर सकें। यह आयोजन नीति-निर्माण की चुनौतियों, अवसरों और भविष्य की दिशा पर विचार साझा करने का एक समावेशी मंच प्रदान करता है।
यह फेस्टिवल पिछले वर्ष भी आयोजित हुआ था, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया था और महत्वपूर्ण शैक्षिक तथा आर्थिक विषयों पर जन-चिंतन किया गया था।
फोकस: प्रौद्योगिकी और समाज
इस वर्ष के फेस्टिवल का विषय “Decoding Technology and Society” तकनीक के तेजी से विकसित हो रहे प्रभाव को केंद्रीय रूप से देखता है—कि कैसे
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तकनीक सामाजिक ढांचे,
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राज्य की क्षमताएँ, और
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भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षाएँ
पर प्रभाव डाल रही है।
प्रतिभागी ऐसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे कि डिजिटल आर्थिक विकास, आर्थिक नीति, सामाजिक बदलाव, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार, और तकनीक के नैतिक तथा सामाजिक परिणाम किस प्रकार भविष्य के निर्णयों को प्रभावित करेंगे।
आयोजन स्थल — GIPE
पुणे के गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (GIPE) में आयोजित यह आयोजन नीति-सम्बंधित शोध और विचार-विमर्श के लिए एक प्रमुख शैक्षणिक मंच माना जाता है। GIPE ने दशकों से सार्वजनिक अर्थशास्त्र, सामाजिक नीति और आर्थिक शोध के क्षेत्र में प्रतिष्ठित योगदान दिया है और यह फेस्टिवल उसी विरासत को आगे बढ़ाता है।
उद्देश्य और महत्व
यह पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल नीति-निर्माण के क्षेत्र में नवाचार, शोध और व्यावहारिक समाधान पर ज़ोर देता है, ताकि:
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भारत और वैश्विक स्तर पर नीति-संवेदना को मजबूत किया जा सके,
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टेक्नोलॉजी-सम्बन्धी नीतियों की समझ बढ़े,
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और समाज-राज्य-तकनीक के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
फेस्टिवल से जुड़े संगोष्ठियों, पैनल चर्चा और विशेषज्ञ सत्रों के जरिए छात्रों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं को अंतर-अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा, जिससे न केवल नीतिगत समझ में वृद्धि होगी बल्कि समाज और भविष्य की चुनौतियों के समाधान के लिए उपयोगी मार्गदर्शन भी मिलेगा।








