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बारावी उत्तीर्ण विद्यार्थियों के सामने महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं से पहले ‘APAAR ID’ रजिस्ट्रेशन में हो रही देरी ने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। कई छात्रों के AAPAR ID नहीं बनने के कारण उन्हें आगे की सीईटी जैसे प्रवेश परीक्षाओं के लिए आवेदन करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है समस्या?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रत्येक विद्यार्थी का APAAR ID (Automated Permanent Academic Account Registration) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड का डिजिटल ट्रैक रखा जा सके। इस ID के बिना कोई भी छात्र सीईटी या अन्य प्रवेशपूर्व परीक्षा का फॉर्म नहीं भर पाएगा।
नाशिक में स्थिति
नाशिक जिले में कुल 89.16% विद्यार्थियों के APAAR ID तो बन चुके हैं, लेकिन लगभग 8,000 छात्रों के ID अभी तक तैयार नहीं हुए हैं। 31 जनवरी 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन देरी के कारण छात्रों में तनाव और चिंता बढ़ रही है।
क्यों है यह जरूरी?
बारावी के बाद मार्च से विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं की शुरुआत होने वाली है, जिसमें APAAR ID होना अनिवार्य है। यदि ID नहीं बनी, तो इन परीक्षाओं में बैठने का अधिकार भी खतरे में पड़ सकता है।
प्रक्रिया में बाधाएँ
शिक्षकों और अधिकारियों का कहना है कि आधार वेरिफिकेशन में त्रुटियाँ, नाम या जन्मतिथि में विसंगतियाँ और पालक की स्वीकृति न मिलना जैसी वजहों से कई छात्रों के ID बनने में देरी हो रही है।
टिका‑टिप्पणी
APAAR ID का लक्ष्य छात्रों के शैक्षणिक सफर को सुव्यवस्थित बनाना है, लेकिन समय पर ID न मिलने से कई युवा अपनी उच्च शिक्षा की राह में बाधा महसूस कर रहे हैं। नाशिक अंदाजे के मुताबिक इस समस्या के समाधान के लिए अंतिम तारीख 31 जनवरी तक तेजी से कार्यवाही जारी है।








