• Create News
  • ▶ Play Radio
  • महिलाओं की गरिमा और शिक्षा: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जनवरी 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है, जिसमें मासिक धर्म स्वास्थ्य (Menstrual Health) को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना गया है। कोर्ट ने कहा कि लड़कियों और महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड और सुरक्षित स्वच्छता सुविधाएँ उपलब्ध कराना राज्य की ज़िम्मेदारी है ताकि उन्हें गरिमा, स्वास्थ्य और समान शिक्षा का अधिकार मिल सके।

    स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी पैड, अलग-अलग शौचालय अनिवार्य

    सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सभी सरकारी तथा निजी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को जैव-अपघट्य (biodegradable) सैनिटरी पैड मुफ्त में उपलब्ध कराएँ। अगर कोई प्राइवेट स्कूल इन सुविधाओं को नहीं देता है, तो उसकी मान्यता रद्द किए जाने की चेतावनी दी गई है। साथ ही लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग functional (कार्यशील) शौचालय, पानी, साबुन और डायस्पोजल (फेंकने) की उचित व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है।

    कोर्ट का दृष्टिकोण: गरिमा, समानता और शिक्षा

    न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की बेंच ने स्पष्ट किया कि मासिक धर्म स्वास्थ्य का अभाव लड़कियों से उनके शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा और निजी जीवन के अधिकार को छीनता है। अदालत ने कहा कि जब तक पर्याप्त स्वच्छता सुविधाएँ और सुरक्षा नहीं होगी, लड़कियाँ शिक्षा में पूरी तरह भाग नहीं ले सकतीं। इसीलिए, यह मामला केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि संविधान के मूलभूत अधिकारों का मामला भी है

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अलग-अलग शौचालय की कमी और सैनिटरी उत्पादों की उपलब्धता न होना “गिरिजन्या की गरिमा” पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और यह समान शिक्षा के अधिकार को प्रभावित करता है।

    समावेशी और सुरक्षित सुविधाएँ अनिवार्य

    कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी स्कूलों में अक्षम विद्यार्थियों के लिए सुविधाजनक शौचालय बनाए जाएँ तथा सैनिटरी पैड को टॉयलेट परिसर या निकट स्थानों पर उपलब्ध कराया जाये ताकि लड़कियों को गोपनीयता मिल सके और वे बिना झिझक इसके उपयोग कर सकें।

    समाज-स्तर पर सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद

    विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा में भागीदारी और सामाजिक गरिमा को मजबूती देगा तथा पीरियड शेमिंग और लैंगिक भेदभाव जैसे सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देगा। इससे न केवल शिक्षा तक लड़कियों की पहुँच बेहतर होगी, बल्कि सामाजिक मानसिकता में भी परिवर्तन आने की सम्भावना है।

  • Related Posts

    बांसवाड़ा की चुड़ादा ग्राम पंचायत में ग्राम विकास चौपाल आयोजित, सीएम भजनलाल शर्मा ने राजीविका समूहों को दिए 7 करोड़ के चेक

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। राजेश चौधरी | बांसवाड़ा | समाचार वाणी न्यूज़ बांसवाड़ा जिले की चुड़ादा ग्राम पंचायत में मंगलवार को “ग्राम विकास चौपाल”…

    Continue reading
    पीएम नरेंद्र मोदी को FAO का ‘एग्रीकोला मेडल’, भारत के अन्नदाताओं और कृषि शक्ति को मिला वैश्विक सम्मान

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। राजेश चौधरी | जयपुर | समाचार वाणी न्यूज़ भारत के लिए गर्व के क्षण में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *