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  • 9 साल की अर्शी गुप्ता ने रचा इतिहास, नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप जीतने वाली भारत की पहली महिला बनीं

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    भारत की धरती पर खेलों का इतिहास अक्सर उन बच्चों ने बदला है जिनके सपनों की कोई उम्र नहीं होती — और ऐसा ही कुछ कर दिखाया है फरीदाबाद की 9 वर्षीय अर्शी गुप्ता ने। अर्शी ने 2025 FMSCI नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप में खिताब जीतकर एक ऐसा कीर्तिमान रच दिया है, जिसकी गूंज अब पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। वे भारत की पहली महिला बनी हैं जिन्होंने इस प्रतिष्ठित मोटरस्पोर्ट इवेंट में जीत हासिल की है, साथ ही वे सबसे कम उम्र की विजेता भी हैं।

    बेंगलुरु के मेको कार्टोपिया सर्किट पर आयोजित इस प्रतियोगिता में देशभर के दिग्गज युवा रेसर्स ने हिस्सा लिया था। माइक्रो मैक्स क्लास कैटगरी में अर्शी ने लड़कों और लड़कियों दोनों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी को पीछे छोड़ दिया। यह वही कैटेगरी है जिसमें भारत के कई प्रसिद्ध रेसर्स ने अपने करियर की शुरुआत की थी।

    फरीदाबाद की रहने वाली अर्शी ने न केवल इस प्रतियोगिता में जीत दर्ज की, बल्कि अपने जुनून, आत्मविश्वास और कौशल से यह साबित कर दिया कि खेल की दुनिया में उम्र कोई बाधा नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अर्शी ने पूरे रेसिंग सर्किट में अपने बेहतरीन नियंत्रण और तेज़ रणनीति के दम पर यह ऐतिहासिक जीत हासिल की।

    अर्शी का जन्म 18 अक्टूबर 2016 को हुआ था। वे वर्तमान में दिल्ली पब्लिक स्कूल, फरीदाबाद की छात्रा हैं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने साल 2024 में कार्टिंग रेसिंग की शुरुआत की थी, यानी उन्हें यह खेल खेले हुए अभी सिर्फ दो साल ही हुए हैं। बावजूद इसके, उन्होंने इतने कम समय में जिस स्तर पर खुद को पहुंचाया है, वह वाकई प्रेरणादायक है।

    वे लीपफ्रॉग रेसिंग टीम का हिस्सा हैं, जो भारत में युवाओं को मोटरस्पोर्ट्स में प्रशिक्षित करती है। उनकी कोचिंग टीम ने बताया कि अर्शी शुरुआत से ही बेहद फोकस्ड और निडर रही हैं। रेस ट्रैक पर वे हर मोड़ पर गति और नियंत्रण के बीच शानदार संतुलन बनाए रखती हैं, जो किसी अनुभवी रेसर की पहचान होती है।

    अर्शी ने अगस्त 2025 में मद्रास इंटरनेशनल कार्टिंग एरिना में भी राउंड-3 जीतकर सबको चौंका दिया था। इसके अलावा उन्होंने कोयंबटूर राउंड में भी अपनी जबरदस्त जीत दर्ज की थी। इन जीतों ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया और अब बेंगलुरु में उन्होंने इस सिलसिले को एक ऐतिहासिक खिताब में बदल दिया।

    अर्शी की मां का कहना है कि “अर्शी को बचपन से ही स्पीड और गाड़ियों का शौक था। पहले वह खिलौनों की कारों के साथ घंटों खेला करती थी और बाद में जब उसे असली रेसिंग ट्रैक पर जाने का मौका मिला तो वह वहीं की हो गई। हमें उस पर बहुत गर्व है।”

    मोटरस्पोर्ट्स जैसे पुरुष-प्रधान क्षेत्र में एक 9 साल की लड़की का इस तरह का प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व की बात है। इस जीत के साथ अर्शी न केवल भारत की पहली महिला नेशनल कार्टिंग चैंपियन बनीं हैं, बल्कि उन्होंने यह भी दिखा दिया है कि भारतीय लड़कियां अब हर क्षेत्र में अपनी गति से इतिहास लिख रही हैं।

    फेडरेशन ऑफ मोटर स्पोर्ट्स क्लब्स ऑफ इंडिया (FMSCI) के अध्यक्ष ने अर्शी की उपलब्धि पर कहा, “यह भारतीय मोटरस्पोर्ट्स के लिए एक ऐतिहासिक पल है। अर्शी जैसी युवा प्रतिभाओं से यह साबित होता है कि हमारे देश में विश्वस्तरीय रेसर्स तैयार हो रहे हैं।”

    अर्शी की इस जीत के बाद उन्हें न केवल रेसिंग समुदाय से बल्कि सोशल मीडिया पर भी खूब सराहना मिल रही है। देशभर से लोग उनकी तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं, और उन्हें “भारत की स्पीड क्वीन” का नाम दे रहे हैं।

    अब अर्शी का अगला लक्ष्य एशियन कार्टिंग चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने का है, जहां वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनके कोच का मानना है कि अगर उन्हें उचित सहयोग और संसाधन मिले, तो आने वाले वर्षों में अर्शी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए मेडल ला सकती हैं।

    अर्शी गुप्ता की यह उपलब्धि सिर्फ एक रेसिंग खिताब नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि अगर हौसला बड़ा हो तो उम्र मायने नहीं रखती। उनकी कहानी न केवल मोटरस्पोर्ट्स की दुनिया के लिए प्रेरणादायक है बल्कि हर उस बच्चे के लिए मिसाल है जो अपने सपनों की रफ्तार से आगे बढ़ना चाहता है।

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