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काठमांडू: नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद Balen Shah के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा भारत से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए हैं। भारत से आने वाले सामानों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने और भारतीय वाहनों पर नए नियम लागू करने के बाद अब भारत के एक फैसले ने नेपाल में बड़ी हलचल पैदा कर दी है।
भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 30 सितंबर तक सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। भारत के इस फैसले का सबसे बड़ा असर नेपाल पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि नेपाल चीनी आपूर्ति के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर है।
विशेष रूप से त्योहारों और उत्सवों के दौरान नेपाल में चीनी की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में भारत से आपूर्ति रुकने के कारण नेपाल में चीनी की कमी और कीमतों में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
नेपाल सरकार ने हाल के दिनों में भारत से आयात होने वाले सामानों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया था। इसके अलावा भारत से नेपाल जाने वाले वाहनों के लिए पहचान पत्र दिखाना और क्यूआर कोड के जरिए अस्थायी पंजीकरण कराना भी अनिवार्य किया गया है। इस जटिल प्रक्रिया के कारण सीमावर्ती इलाकों में व्यापार प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
इसके साथ ही लिपुलेख सीमा विवाद को लेकर भी नेपाल सरकार की भारत विरोधी भूमिका चर्चा में रही है। इन फैसलों के बाद दोनों देशों के संबंधों को लेकर राजनीतिक और व्यापारिक हलकों में लगातार चर्चा हो रही है।
अब भारत द्वारा चीनी निर्यात पर रोक लगाए जाने के बाद नेपाल सरकार वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने में जुट गई है। बताया जा रहा है कि नेपाल अन्य देशों से चीनी आयात करने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है ताकि घरेलू बाजार में संकट की स्थिति न बने।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नेपाल में व्यापारियों और आम लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर स्थिति और गंभीर हो सकती है।








