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भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चला आ रहा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) विवाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। लेकिन इस बार हालात पहले से अलग हैं। भारत के रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख के हालिया बयानों ने देश और विदेश दोनों में हलचल मचा दी है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि “POK भारत का अभिन्न हिस्सा है और उसे वापस लेना हमारा संवैधानिक दायित्व है।” वहीं, सेना प्रमुख ने भी दृढ़ता से कहा है कि “अगर आदेश मिला तो भारतीय सेना कुछ ही दिनों में POK को मुक्त कराने में सक्षम है।” इन बयानों के बाद अब यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या भारत वास्तव में “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” की तैयारी कर रहा है — यानी वह निर्णायक कदम जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का भूगोल ही बदल सकता है।
भारत की नई रणनीतिक चाल — ‘चीन वाला मॉडल’
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस बार POK पर किसी पारंपरिक सैन्य हमले की नहीं, बल्कि “रणनीतिक दबाव और भू-राजनीतिक अलगाव” की नीति पर काम कर रहा है। इसे कई विशेषज्ञ “चीन वाली चाल” कह रहे हैं — यानी वह नीति जिसमें युद्ध किए बिना ही विरोधी देश के भीतर अस्थिरता पैदा कर दी जाए।
चीन ने जिस तरह दक्षिण चीन सागर में अपनी ‘सॉफ्ट इन्क्रूजन’ रणनीति अपनाई थी, उसी तरह भारत अब POK में सामाजिक, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर प्रभाव बढ़ाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने POK में बढ़ते असंतोष का गहन अध्ययन किया है। वहां के स्थानीय लोग पाकिस्तान सरकार की नीतियों और आतंकवादी गुटों के दमन से परेशान हैं। भारत अब इस असंतोष को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उजागर कर, पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने की योजना बना रहा है।
‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ की आहट
पिछले साल सीमापार आतंकवाद के खिलाफ भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत कई गुप्त मिशन चलाए थे, जिनमें आतंकी लॉन्चपैड और कमांड नेटवर्क को भारी नुकसान हुआ था। अब सेना सूत्रों का कहना है कि “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इसका उद्देश्य केवल आतंकवाद को खत्म करना नहीं, बल्कि पाकिस्तान की LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर सामरिक दबदबा बनाना है।
कहा जा रहा है कि भारत ने हाल ही में LOC के साथ नई निगरानी तकनीकें, स्वदेशी ड्रोन और सैटेलाइट इंटेलिजेंस सिस्टम तैनात किए हैं। साथ ही, सेना के विशेष बलों को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस सबके पीछे एक ही लक्ष्य दिखता है — यदि जरूरत पड़ी, तो भारत सीमित सैन्य कार्रवाई के माध्यम से POK में निर्णायक बढ़त हासिल कर सके।
पाकिस्तान में बढ़ता राजनीतिक संकट — भारत के लिए अवसर
इस समय पाकिस्तान खुद राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के दबाव, महंगाई, ऊर्जा संकट और राजनीतिक अस्थिरता ने वहां की जनता को सरकार के खिलाफ खड़ा कर दिया है। ऐसे में भारत के लिए यह रणनीतिक रूप से उपयुक्त समय माना जा रहा है।
भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की आंतरिक कमजोरी और सेना में विभाजन की स्थिति भारत के लिए POK पर दबाव बनाने का सुनहरा मौका है। सेना प्रमुख जनरल अनिल चौहान के बयान को इसी रणनीति का संकेत माना जा रहा है। उन्होंने कहा था, “भारतीय सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है, चाहे वह कूटनीतिक हो या सैन्य। हमारे पास वह क्षमता है जो दुश्मन के भूगोल को भी बदल सकती है।”
POK में बढ़ रहा विद्रोह और जनता का आक्रोश
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कुछ महीनों से जनता का असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। मुजफ्फराबाद, गिलगित और स्कर्दू जैसे क्षेत्रों में लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। वहां के लोग बिजली, पानी और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। पाकिस्तान की सेना और आईएसआई द्वारा स्थानीय नेताओं को दबाने की कोशिश ने स्थिति को और भड़का दिया है।
भारत अब इस जनाक्रोश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है। विदेश मंत्रालय ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि “POK में मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है, और पाकिस्तान वहां के नागरिकों की आवाज दबा रहा है।” इस बयान को भारत की आगामी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भू-राजनीतिक समीकरणों में बदलाव
भारत की यह नीति केवल पाकिस्तान के खिलाफ नहीं, बल्कि चीन के प्रभाव को सीमित करने के उद्देश्य से भी जुड़ी है। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का एक बड़ा हिस्सा POK से होकर गुजरता है। भारत यदि POK में अपनी स्थिति मजबूत करता है, तो चीन की पूरी ‘बेल्ट एंड रोड’ परियोजना को बड़ा झटका लग सकता है। यही वजह है कि बीजिंग भी इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।
रक्षा विश्लेषक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) वी.के. मल्होत्रा कहते हैं, “भारत अब पारंपरिक युद्ध की दिशा से हटकर आधुनिक ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ अपना रहा है। यह सिर्फ सीमा पर नहीं, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक और सूचना स्तर पर भी दुश्मन को कमजोर करने की रणनीति है। अगर यह नीति सफल होती है, तो पाकिस्तान का नक्शा वाकई बदल सकता है।”
सेना की तैयारी और राष्ट्रीय नेतृत्व का संकेत
प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के हालिया बयानों से भी यही झलकता है कि सरकार अब ‘स्थिति का इंतजार’ नहीं, बल्कि ‘स्थिति बदलने’ के पक्ष में है। रक्षा मंत्री ने कहा था, “हमारा अगला लक्ष्य राष्ट्रीय एकता को संपूर्ण बनाना है। जम्मू-कश्मीर हमारा था, है और रहेगा — और अब समय है कि जो हिस्सा हमारे अधिकार में नहीं, वह भी हमारे साथ आए।”
सेना ने भी आंतरिक रूप से अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। उच्च पर्वतीय युद्ध इकाइयों को नए हथियार, सर्दियों में ऑपरेशन की ट्रेनिंग और उन्नत निगरानी प्रणाली से लैस किया गया है। यह सब संकेत देता है कि भारत अब किसी बड़े मोड़ पर खड़ा है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर भारत की रणनीति अब पहले जैसी नहीं रही। यह केवल बयानबाजी का दौर नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध और बहुआयामी अभियान की शुरुआत है। रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत की यह नीति दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है।








